प्राचार्य परिसर में अपने आवास में क्यों नहीं रहते हैं?

0

राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, लखनऊ परिसर के प्राचार्य विजय कुमार जैन, वार्डन देवीप्रसाद द्विवेदी की गुंडागर्दी का आलम यह है कि नादान बच्चों का जीवन बरबाद करने के लिए उन्हें अवकाश के दिन अपने ऑफिस में बुलाकर उन्हें संस्थान परिसर से जाने के लिए धमका रहे हैं।

भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह जी के लोकसभा क्षेत्र में और योगीराज में संस्कृति और संस्कृत का इस कदर विनाश अपेक्षित नहीं है। सरकार से सम्बन्धित कोई भी छात्र कल्याण सम्बन्धित क्रियाकलाप इन तथाकथित लोगों के द्वारा परिसर में नहीं होता है।

ये कांग्रेसी विचारधारा को मानने वाले लोग स्वार्थ सिद्धि हेतु संस्थान परिसर को नर्क बनाने में अग्रसर हैं। चाहे बलि किसी की भी हो, इन्हें कोई फर्क नहीं पडता है। नादान छात्रों की बलि देनी हो अथवा वाचस्पति नाथ झा जैसे अध्यापक की बलि देनी हो। बुद्धि को आगे बढाने की अपेक्षा अपने निजी स्वार्थ की पूर्त्ति में ये लगे हुये हैं। छात्र तो परस्पर समझौता तक कर लिये हैं, लेकिन यह अध्यापक अभी भी व्यक्तिगत दुशमनी इन छात्रों से निकाल रहे हैं।
आलम यह है कि देवीप्रसाद द्विवेदी जैसे अध्यापक अपने विभाग में अध्यापन कर रहे अन्य अतिथि अध्यापकों के साथ चपरासी से भी निकृष्ट व्यवहार करते हैं और अपने कोर्स को जबरन उनसे पढवाते हैं। उनसे चाय मंगवाना, पान मंगवाने जैसे कार्य तक कराते हैं। जिसकी सेलरी खुद लेनी है, लेकिन अध्यापन के नाम पर छात्रविरोधी कार्य करने हैं। अतिथि अध्यापकों के स्वाभिमान को कुचल कर रख दिया गया है, अपनी नजरों से नजरें वे नहीं मिला पाते, क्योकि उन्हें इनकी गुंडागर्दी का डर है।
कल एक प्रोफ़ेसर का मेरे पास फोन आया, तो उन्होने मुझसे कहा कि परिसर के छात्रों को पूडी सब्जी कुछ ज्यादा ही मिल रही है, इसलिए उछल रहे हैं। इनको तो सबक सिखाना पडेगा। और आज वे उनको अपने ऑफ़िस में बुलाकर धमका रहे हैं।
आपसे निवेदन है कि संस्कृत का रक्षण करें, भक्षण नहीं।
प्राचार्य परिसर में अपने आवास में क्यों नहीं रहते हैं? उनका HRA कहां जाता है, फिर रहता कौन है? Why principle is not living in campus? Why hostel warden is not living in hostel? इत्यादि प्रश्न अभी बाकी हैं।
यह संघर्ष आगे जारी रहेगा, यदि छात्रों के विरुद्ध मनमानी की, तो सारे भ्रष्टाचारी नापे जायेंगे। २३ लाख का घोटाला उजागर किया जायेगा। मानव संसाधन विकास मन्त्रालय से शीघ्र ही एक कमिटी गठित की जानी है और सुरक्षा हेतु गृहमन्त्रालय भी जाया जायेगा।
मठाधीशी छोडकर छात्रहितों के लिए आगे आना ही एकमात्र उपाय है, जिससे शांति स्थापित हो सकती है।

योगेंद्र सौर्य भारद्वाज की फेसबुक वाल से
संतोष पांडेय की खबर

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

9 + 1 =