क्यों सिर्फ नकल के लिए कमिश्नर रीवा को करना पड़ा हस्तक्षेप

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आखिर क्यों नहीं दी जा रही चुरहट भू अर्जन मुआवजे की राशि की नकल एवं जानकारी ?

क्यों सिर्फ नकल के लिए कमिश्नर रीवा को करना पड़ा हस्तक्षेप।

लाओ और पाओ के खेल में खंड लेखक रीडर और स्थानीय वकील की भूमिका है ।

सीधी। तहसील चुरहट में कार्यालय SDM की यह बात जगजाहिर है कि श्रीमान IAS वर्मा जी के कार्यालय में किसी भी आवेदन की प्रति प्राप्त लेना बहुत ही मुश्किल काम हैं । लेकिन एक काम नामुमकिन है वह है चुरहट बाईपास के भू अर्जन में मुआवजा राशि की नकल प्राप्त करना।

इससे संबंधित जो भी व्यक्ति नकल लेने गया उसे बैरंग लौटना पड़ा। मामला यहां तक पहुंच गया कि एक सख्स को इस वावत कमिश्नर रीवा कार्यालय जाना पड़ा , वहां से जब कमिश्नर साहब ने सख्त निर्देश देते हुए आदेश दिया कि सभी को नकल दी जावे उन्हें मिने वाली मुआवजा राशि की तो दलाल गैंग में हड़कंप मचा हुआ है।

दरअसल पडताड़ करने पे वहुत ही घटिया स्तर का भ्रष्टाचार सामने आया है। बात यह है कि स्थायी बाबू होते हुए भी माननीय SDM ने एक खंड लेखक को अपना रीडर बना रखा है ? क्यों ? इसका कोई जबाब नहीं ।

अब बात यह है कि अकारण ही लोगों का मुआवजा क्यों रखा है माननीय ने ? इसका स्पष्ट उत्तर तो शायद उन्हें न्यायालय की किसी पीटिशन में देना भारी पड़ जाए।
पिछली बार हमने खंड लेखक द्वारा खाली चेक मांगने वाली खबर लिखी थी।
हमने पाया कि चुरहट में कुछ लोग सक्रिय रूप से मुआवजा मिलने वाले लोगों के घर जा जाकर उनसे कहा रहे हैं कि आपका मुआवजा हम दिलवा देंगे।
इसके एवज में जो भी बातचीत होती हो वह जगजाहिर है।
दूसरे तरह के मामले ऐसे आये कि इन लोगों को स्पष्ट जानकारी है कि किसे कितना मुआवजा मिल रहा है लेकिन मुआवजा पाने वाले को नहीं।
उदाहरण के लिए किसी को 50 लाख सामान्य रूप में मिल रहा है लेकिन उसे पता नहीं। तो खंड लेखक या उस गुरगा और सरकारी जमीन पे कब्जे से चर्चित एक वकील इनके पास

जाकर बोलते हैं कि आपको 20-30 लाख मिल रहा है , हम चाहें तो इसे 50 करवा सकते हैं । जिसमे जो डील होती है वह सब समझते हैं।

चुरहट के भू अर्जन में माननीय SDM ने तो मुआवजा के लिए प्रकाशित सूची में इतनी मनमानी की है कि खसरे की तत्कालीन स्थिति को नकार अपने मन मुताबिक छपवाया है। जिनके डायवर्शन थे उनके नही छापे जिससे बाद में डायवर्शन के नाम पे कुछ भी किया जा सके।
इसका स्पष्ट प्रमाण यह है कि मुआवजा एक साथ सबको न देते हुए एक एक से दिया जा रहा है।

अनिमियतताओं के इस भू अर्जन के विषय मे हमने पहले भी लिखा है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं , लगता है कि बंदरबांट का यह सिलसिला बहुत ऊपर तक जारी है।

Surendra Pateria

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