चमत्कारिक है तहसील प्रांगण मे स्थापित अति प्राचीन शिव लिंग

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चमत्कारिक है तहसील प्रांगण मे स्थापित अति प्राचीन शिव लिंग ।

तत्कालीन उपजिलाधिकारी शेरी ने भी यहॉ पर कराया था बिशालकाय हवन ।

मिश्रित सीतापुर / आशुतोष शिव की तपस्थली वाले आरण्य क्षेत्र जो वर्तमान में महर्षि दधीच की तपोस्थली के रूप में विश्व विख्यात है यहां के तहसील प्रांगण में अति प्राचीन शिवलिंग जो पहले कभी तहसीलदार आवास के अंदर हुआ करता था सौंदर्यरी करण के नाम पर भवनों के टूटने के कारण खुले आसमान के नीचे आ गया है जिसकी तरफ से वर्तमान तहसील प्रशासन अपना मुंह मोड़ कर पूरी तरह से उपेक्षात्मक रुख अपनाए हुए हैं जबकि इस सिद्ध शिवलिंग की पूजा और कृपा से यहां तैनात रहे कई तहसीलदार वर्तमान में प्रदेश में उच्च पदों पर आसीन हैं कुछ तो सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं कहना गलत न होगा यह चमत्कारिक शिवलिंग यहां के वर्तमान अधिकारियों की उपेक्षा का दंश झेलता हुआ पूरी तरह से कलयुग के प्रकोप में आने की कहावत को चरितार्थ कर रहा है ज्ञातव्य हो कि उक्त चमत्कारिक शिवलिंग के विषय में इसी तहसील में वर्षों पहले सेवानिवृत्त हो चुके अतिथि बुजुर्ग कर्मचारी कन्हैया लाल श्रीवास्तव ने बताया कि यहां के तहसीलदार आवाज के अंदर एक अति प्राचीन शिवलिंग स्थापित था जो सौंदर्यरी करण के नाम पर भवनों के टूटने के कारण अब खुले आसमान के नीचे आ गया है जिसको उक्त भवनों के टूटने के समय भी कोई क्षति नहीं पहुंची है चमत्कारिक शिवलिंग अपने पूर्ण रूप में स्थापित है पूर्व कर्मचारी श्री श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि मेरे कार्यकाल के पहले से स्थापित यह शिवलिंग वास्तव में चमत्कारिक है और मेरे कार्यकाल के दौरान यहां तहसीलदार क्रमश: जय चंद्र, मूलचंद्र वर्मा ,सोहनलाल शुक्ला ,श्यामलाल तिवारी ,लक्ष्मीनारायण ,नागेंद्र शर्मा , इंद्रराज बहादुर सिंह, खरे ,मृत्युंजय ,अयोध्या, लक्ष्मण प्रसाद ,लव कुमार सिंह, आदि यहां तहसीलदार के रूप में कार्यरत रहे जो इस शिवलिंग की पूजा और कृपा के चलते यहां से स्थानांतरण के बाद प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर उच्च पदों पर आसीन हुए अधिकारियों को में धार्मिक प्रवृत्ति के कारण फूल और बेलपत्र लाकर प्रतिदिन देता था और वे श्रद्धा भाव से इस शिवलिंग का पूजन अर्चन करते थे इसी शिवलिंग की अनुकंपा से उम्मीद की पदोन्नति और प्रदेश में उच्च पदों पर आसीन होकर राज्य सरकार का कार्य प्रमुखता से किया और कुछ वर्तमान में भी कर रहे हैं वर्तमान में खुले आसमान के नीचे उपेक्षा का दंश झेल रहे शिवलिंग पर धर्मावलंबियों की आस्था में कोई कमी नहीं आई है तहसील के कुछ कर्मचारी तो इनके प्रति श्रद्धा भाव रखते ही हैं वहीं क्षेत्र के धर्मावलंबी लोग भी इनका पूजन-अर्चन करने में लगे हुए हैं जैसे कि यहां पर तैनात अपर तहसीलदार बिंदु लता प्रतिदिन सुबह-शाम पूजन-अर्चन कर कल्याण की कामना करती हैं वही तहसील में कार्यरत कर्मचारी केशन ने यहां पर श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन भी कराया था इतना ही नहीं बीते शिवरात्रि के दिन यहां के शिव भक्तों ने इस स्थान पर रामचरितमानस का पाठ कराया था इसके अतिरिक्त नवरात्रि के अवसर पर धर्मावलंबियों द्वारा इस स्थान पर जगराता का भी आयोजन धूम-धड़ाके से कराया जाता है बीते कुछ दिनों पहले यहां पर तैनात रही उपजिलाधिकारी सु श्री शेरी ने भी इस चमत्कारिक शिवलिंग के स्थान पर धर्मावलंबियों के सहयोग से विशालकाय हवन आदि का आयोजन कराया था जिसमें क्षेत्रीय विधायक रामकृष्ण भार्गव के साथ ही तमाम शिव भक्तों ने शिरकत की थी लोगों की आस्था का प्रतीक दिया चमत्कारिक शिवलिंग वर्तमान में उपेक्षा का दंश झेल रहा है जबकि कुछ धर्मावलंबियों ने इसके चबूतरे का रंग रोगन करा कर उनका नामकरण चमत्कारेश्वर नाथ के नाम से कर दिया है अब क्षेत्रीय लोगों में यह जिज्ञासा है कि तहसील प्रांगण के चमत्कारेश्वर नाथ अगला कौन सा चमत्कार दिखाएंगे तहसील के अधिवक्ता इस बात के जिज्ञासु हैं कि इस तहसील के बाद में बनी जनपद के अंदर अन्य तहसीलों में मुंसिफ कोर्ट की स्थापना हो चुकी है लेकिन यह तहसील अभी तक मुंसिफ कोर्ट की बाट ही जोह रही है जबकि इसका कुछ भाग काटकर नई तहसील महोली में सृजन कर दिया गया है फिर भी यहां मुंसिफ न्यायालय स्थापित नहीं हो सका है अधिवक्ताओं का कहना है कि अब शायद चमत्कारेश्वर नाथ यहां मुंसिफ न्यायालय स्थापित कराकर अपना चमत्कार दिखा दें क्योंकि यहां के जनप्रतिनिधि चुनाव के समय वादे तो अनेक करते हैं लेकिन जीतने के बाद अपने किए गए वादों को भूल जाते हैं यही कारण है कि तहसील के अधिवक्ता इस तहसील के मुंसिफ कोर्ट की स्थापना के लिए चमत्कारेश्वर नाथ की अरदास करने में लग गए हैं ।

श्रवण कुमार मिश्र

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