23 अगस्त यानी आज है वड़ा पाव दिवस

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यह सब कैसे शुरू हुआ?

वड़ा पाव की शुरूआत 1966 में अशोक वैद्य वड़ा पाव थेला से हुई, जो कि दादर स्टेशन के बाहर की ओर स्थित था. इन्होंने ही सबसे पहले चटनी के साथ क्रीस्पी गर्म वड़ा और पाव लोगों की भूख भगाने के लिए पेश किया था.

मुम्बई का प्रसिद्ध व्यंजन है वड़ा पाव

अगर हम आगे जाएं तो देखेंगे कि वड़ा पाव की जड़े पूरे विश्व में फैल चुकी हैं. पाव का मुख्य मूल पूर्तगाल से संबंध रखता है, पटेटो वड़ा भारत में डच द्वारा लाया गया. लेकिन हां, पाव, वड़ा और चटनी को आपस में बांधने का पूरा श्रेय मुंबई को ही जाता है और तब से मुंबई के लोगों द्वारा इसे स्नैक्स की तरह पसंद किया जाने लगा.

यहां तक की, वड़ा पाव मुंबई में इतना फेमस हो गया कि साल की हर 23 अगस्त को वड़ा पाव दिवस के रूप में मनाया जाता है.

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