आर.एस.एस नेता के घर पर हुआ भ्रष्टाचार मामले में समझौता

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27 जुलाई 2018
संजय पांचाल रोहतक(हरियाणा)

एस.आई.टी ने तीन अधिकारियों को दे दी क्लीन चिट, एक और को बाहर निकालने की तैयारी

मामला : राईस मिलर्स से 20 लाख रुपए मांगने पर 5 अधिकारियों के खिलाफ हुए दर्ज मामले में क्लीन चिट देने का

करनाल बीती जनवरी में करनाल के राईस मिलर्स से 20 लाख रुपए की रिश्वत लेने के मामले में 5 अधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर अब एक आर.एस.एस के नेता ने अहम भूमिका निभाई है। सूत्रों ने बताया है कि भ्रष्टाचार से जुड़े इस मामले में आर.एस.एस नेता के घर पर समझौता करवा दिया गया है। सूत्रों ने यह भी बताया कि यह समझौता राईस मिलरों तथा अधिकारियों के बीच करवाया गया था। अब इस मामले की जांच कर रही एस.आई.टी की टीम ने तीन अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी है। इसके अलावा एक और अधिकारी को बाहर निकालने की तैयारी की जा रही है। बता दें कि मार्किटिंग बोर्ड के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी मंदीप सिंह बराड़ ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए 5 अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने तथा उन्हें निलंबित करने के आदेश दिए थे। करनाल पुलिस ने बकायदा मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। इसके लिए एक टीम का गठन किया गया था। राईस मिलरों ने पूर्व में आरोप लगाया था कि मार्किट कमेटी के अधिकारी चावल व्यापारी राजेन्द्र रहेजा पर दबाव डालकर उनसे 20 लाख रुपए मांग रहे थे। यह मामला सी.एम की चौखट पर भी पहुंचा था। जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए थे। तत्कालीन मंडीकरण बोर्ड के सी.ए मंदीप बराड़ ने इन भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारी सुनील शर्मा, सौरभ चौधरी, मार्किट कमेटी की सचिव आशा रानी, सुपरवाइजर सतबीर सिंह तथा करनाल के अरविंद टाया को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे। इसी कड़ी में पुलिस ने धारा-380, 384, 506 और 34 के तहत मामला दर्ज कर लिया था। इसके बाद जांच शुरू की गई थी। हैरानी की बात यह है कि इसमें आर.एस.एस के एक नेता ने अपने घर पर बिठाकर भ्रष्टाचार के इस संगीन मामले में शिकायतकर्ता, व्यापारियों और अधिकारियों के बीच समझौता करवा दिया था। अब बोर्ड ने चार अधिकारियों को बहाल भी कर दिया है। हैरानी की बड़ी बात यह है कि इस मामले को लेकर कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इस मामले में राईस मिलर्स एसोसिएशन ने भी चुप्पी साध ली है। शिकायतकर्ता भी चुप बैठ गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का हर बार आगाज करने वाली भाजपा सरकार की इस कार्यशैली पर प्रश्र चिन्ह लगा है। चुनावों के दौरान विपक्ष इस मुद्दे को उठा सकता है। अब घर पर हुए इस समझौते के बाद कौन कितने में बिका है। यह जांच का विषय हो सकता है।

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