प्रयागराज कुम्भ 2019 की विशेषता व् प्रमुख स्नान दिवस

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प्रयागराज कुम्भ 2019 में विशेषता व् प्रमुख स्नान दिवस

कुंभ मेला हिन्दू तीर्थयात्राओं में सर्वाधिक पावन तीर्थयात्रा है। प्रयागराज कुंभ में अनेक कर्मकाण्ड सम्मिलित हैं और स्नान कर्म कुंभ के कर्मकाण्डों में से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। करोड़ों तीर्थयात्री और आगंतुक दर्शकगण कुंभ मेला स्नान कर्म में प्रतिभाग करते हैं। त्रिवेणी संगम पर पवित्र डुबकी लगायी जाती है। पवित्र कुंभ स्नानकर्म इस विश्वास के अनुसरण में किया जाता है कि त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर एक व्यक्ति अपने समस्त पापों को धो डालता है, स्वयं को और अपने पूर्वजों को पुनर्जन्म के चक्र से अवमुक्त कर देता है और मोक्ष को प्राप्त हो जाता है। स्नान – कर्मकाण्ड के साथ-साथ तीर्थयात्री पवित्र नदी के तटों पर पूजा भी करते हैं और विभिन्न साधुगण के साथ सत्संग में प्रतिभाग करते हैं।

मकर संक्रांति (माघ मास का प्रथम दिन, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है) से आरंभ होकर प्रयागराज कुंभ के प्रत्येक दिन इस कर्मकाण्ड का सम्पादन एक पवित्र स्नान माना जाता है, तथापि कतिपय मांगलिक पवित्र स्नान तिथियां और भी हैं। कुंभ मेला के आरंभ से विहित तिथियों पर शाही स्नान जिसे ‘राजयोगी स्नान’ के रूप में भी जाना जाता है, वहां विभिन्न अखाड़ों (धार्मिक आदेशपीठों) के सदस्यों, संतों एवं उनके शिष्यों की आकर्षक शोभायात्रायें निकाली जाती हैं। शाही स्नान कुंभ मेला का प्रमुख स्नान है एवं कुम्भ मेला का केन्द्रीय आकर्षण हैं और महोत्सव का सर्वाधिक महत्वपूर्ण भाग है, केवल शाही स्नान के पश्चात् ही सर्व साधारण को इस विश्वास में पवित्र स्नान करना अनुज्ञात किया जाता है, कि जन सामान्य भी पवित्र संतों के पवित्र कार्यों एवं विचारों के सार कलाप प्राप्त कर सकेंगे।

मकर संक्रान्ति

पौष पूर्णिमा

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मकर संक्रान्ति

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एक राशि से दूसरी राशि में सूर्य के संक्रमण को ही संक्रान्ति कहते हैं । भारतीय ज्योतिष के अनुसार बारह राशियां मानी गयी हैं- मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन, जनवरी महीने में प्रायः 14 तारीख को जब सूर्य धनु राशि से (दक्षिणायन) मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होता है तो मकरसंक्रांति मनायी जाती है । लोग व्रत स्नान के बाद अपनी क्षमता के अनुसार कुछ न कुछ दान अवश्य करते हैं।

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हिंदू धर्म में कुंभ मेला एक महत्‍वपूर्ण पर्व के रूप में मनाया जाता है, जिसमें देश-विदेश से सैकड़ों श्रद्धालु कुंभ पर्व स्थल हरिद्वार, इलाहाबाद, उज्जैन और नासिक में स्नान करने के लिए एकत्रित होते हैं। कुंभ का संस्कृत अर्थ कलश होता है। हिंदू धर्म में कुंभ का पर्व 12 वर्ष के अंतराल में आता है।
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प्रयाग में दो कुंभ मेलों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है। कुंभ का मेला मकर संक्रांति के दिन प्रारम्भ होता है। इस दिन जो योग बनता है उसे कुंभ स्नान-योग कहते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार मान्‍यता है कि किसी भी कुंभ मेले में पवित्र नदी में स्‍नान या तीन डुबकी लगाने से सभी पुराने पाप धुल जाते हैं और मनुष्‍य को जन्म-पुनर्जन्म तथा मृत्यु-मोक्ष की प्राप्‍ति होती है।

रिपोर्ट:- कौशलेश कुमार प्रयागराज

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