पिसता मासूम बचपन, दो वक्त की रोटी की है दरकार

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Pissata innocent childhood, two times roti is needed
पिसता मासूम बचपन, दो वक्त की रोटी की है दरकार

पिसता मासूम बचपन, दो वक्त की रोटी की है दरकार

अबोहर धर्मवीर शर्मा  बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है लेकिन कारखानों, बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों, होटलों, ढाबों पर काम करने से लेकर कचरे के ढेर में कुछ ढूंढता मासूम बचपन आज न केवल 21वीं सदी में भारत की आर्थिक वृद्धि का एक काला चेहरा पेश करता है बल्कि आजादी के करीब 7 दशकों बाद भी सभ्य समाज की उस तस्वीर पर सवाल उठाता है जहां हमारे देश के बच्चों को हर सुख सुविधाएं मिल सकें।

बाल मजदूरी के मायने?
ऐसा कोई भी बच्चा जिसकी उम्र 14 वर्ष से कम हो और वह अपनी जीविका के लिए काम करे तो बाल मजदूर कहलाता है। अकसर बाल मजदूरी की चपेट में वे बच्चे आते हैं जो या तो गरीबी से जूझ रहे होते है या फिर किसी लाचारी या माता-पिता की प्रताडऩा का शिकार हो जाते हैं। आज विश्वभर में करीब 215 मिलियन बच्चे बाल मजूदरी का शिकार हैं जिनमें से सबसे अधिक भारत में मौजूद हैं।

घिनौने कृत्यों का भी सामना करना पड़ता बच्चों को
आज भारत के बड़े व छोटे शहरों में आपको कई बच्चे ऐसे मिल जाएंगे। हर गली के नुक्कड़ पर आपको कोई न कोई राजू या मुन्नी या छोटू जैसे बच्चे मिल जाएंगे जो बाल मजदूरी की गिरफ्त में हैं। ऐसा नहीं है कि ये ब‘चे केवल मजदूरी कर रहे हैं बल्कि इन्हें कई घिनौने कृत्यों का भी सामना करना पड़ता है।
बाल मजदूरी एक अपराध
वर्ष 1986 दौरान बाल मजदूर की इस स्थिति में सुधार के लिए सरकार द्वारा चाइल्ड लेबर एक्ट बनाया गया जिसके अंतर्गत बाल मजदूरी को एक अपराध घोषित किया गया और रोजगार पाने की न्यूनतम आयु 14 वर्ष कर दी गई। सरकार द्वारा ब‘चों के लिए 8वीं तक की शिक्षा को भी अनिवार्य और नि:शुल्क किया गया लेकिन लोगों की बेबसी और गरीबी ने कभी इस योजना को सफल नहीं होने दिया।
जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत
सरकार बाल मजदूरी को जड़ से खत्म करने के लिए जरूरी कदम उठाए और गरीबी को खत्म करने का प्रबंध भी करे। गरीबी को खत्म करने और इन बच्चों के भविष्य को सुधारने के लिए सरकार को कुछ ठोस कदम उठाने होंगे लेकिन केवल सरकार ही नहीं आम जनता को भी इस काम में सहयोग करना जरूरी है।
जनता के सहयोग की जरूरत
सरकार द्वारा बाल मजदूरी को खत्म करने के लिए कानून बनाने के बाद विभिन्न योजनाओं के जरिए इसको खत्म करने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन इस समस्या को जड़ से खत्म करने हेतु आम जनता के सहयोग की अति जरूरत है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी ले तो हो सकता है भारत को जल्द ही बाल मजदूरी से मुक्त किया जा सके और ब‘चों को उचित शिक्षा और उनका हक दिया जा सके।

रिपोर्ट ज्ञानेश पाल हमराही

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