सनातन धर्म का मूल मंत्र है सहिष्णुता-प्रो. शर्मा

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स्वामी विवेकानंद के सपनों का भारत बनाने के लिए युवाओं करना होगा अधिकाधिक कार्य – गिरीश पाल

स्वामी विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा सागर द्वारा विश्व बंधुत्व दिवस पर सरस्वती वाचनालय में आयोजित समारोह में”वर्तमान भारत और विवेकानंद” विषय पर अपने व्याख्यान में हरीसिंह गौर विश्व विद्यालय सागर में दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर अम्बिकादत्त शर्मा ने कहा कि सनातन धर्म का मूल मंत्र सहिष्णुता है।उन्होंने कहा कि शिकागो में स्वामीजी सबसे पहले आभार व्यक्त करते हैं जो भारतीय संस्कृति की आत्मा है।उन्होंने अपना आत्म परिचय संस्कृति के मूल सूत्रों में दिया।मुख्य वक्ता विवेकानंद केंद्र मध्यप्रान्त के प्रशिक्षण प्रमुख गिरीश कुमार पाल ने स्वामी विवेकानंद के शिकागो में ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख करते हुए कहा कि विवेकानंद के सपनों का भारत बनाने युवाओं को अधिकाधिक कार्य करना होगा।मुख्य अतिथि कैप्टन हिमांशु धूलिया ने कहा कि विवेकानंद ने सनातन धर्म,योग,दर्शन,संगीत को विश्व के पटल पर रखकर विश्व गुरु बनाया।उनके कर्म का अकाट्य सिद्धान्त इस समय हमें अत्यंत प्रासंगिक है।अध्यक्षीय उद्बोधन में केंद्र के वरिष्ठ कार्यकर्ता ज्ञानचंद जैन ने कहा कि विवेकानंद ने सनातन संस्कृति की पुनर्स्थापना कर भारत को प्राणवायु प्रदान की।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा मां सरस्वती,भारत माता ,ॐ कार एवं स्वामी विवेकानंद के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित की व दीप प्रज्जवलन किया गया।गौरव राजपूत ने गीत ‘गूंज उठा था विश्व गगन में’ का गायन किया।श्रीमती अंजू श्रीवास्तव ने तीन ॐ कार प्रार्थना की।हिमांशु हार्डिकर ने विवेक वाणी का पाठ किया।केंद्र परिचय एवं स्वागत उद्बोधन केंद्र के नगर प्रमुख नील रतन पात्रा ने दिया।सन्चालन पतंजलि के जिला प्रमुख योगाचार्य भगतसिंह ठाकुर ने किया तथा आभार प्रदर्शन व्यवस्था प्रमुख चन्द्रप्रकाश शुक्ला ने किया।कार्यक्रम का समापन कु.वैष्णवी मिश्रा द्वारा प्रस्तुत शान्ति मंत्र से हुआ।
इस अवसर पर श्री महंत कबीर आश्रम सागर,डॉ. श्याममनोहर सीरोठिया,डॉ.प्रदीप शुक्ला,डॉ.विवेकानंद उपाध्याय,डॉ. सर्वेश्वर उपाध्याय,डॉ.आशीष द्विवेदी,डॉ. ऋषभ भारद्वाज, सुकमल जैन,विकास सेन,संदीप रायकवार,शुभम पटेल,राम नंदन,सुधीर पाराशर,अर्जुन सोनवाने,मयंक ठाकुर आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

Satendra singh baghel

 

 

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