न पानी न मछली ये कैसा तालाब

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रोशनाबाद हरिद्वार

रोशनाबाद का तालाब बना कुड़ागाह। न पानी न मछली ये कैसा तालाब

रोशनाबाद जो कि अब किसी पहचान का मोहताज नही लेकिन जिस गाव में तालाब ओर कुवे का अस्तित्व ही खतरे में हो । तो उसकी ऐतिहासिक पहचानें खतरे में पड़ना तो लाजमी ही है। रोशनाबाद का ये एक मात्र तालाब है जिसमे लोगो ने कूड़ा डाल डालकर पाटना आरम्भ कर दिया है। आस पास के जितने भी घर है उन्हें कूड़ा डालने के लिए अब कही दूर जाने की जरूरत नही पड़ती । घर से निकलते ही सामने तालाब है जिसमे कूड़ा डालते लोग सरकार के सफाई अभियान को चुनौती दे रहे है । यही नही सरकार द्वारा पिछले कुछ समय से तालाब के साफ सफाई और सौन्दर्यकरण की योजनाएं भी चलाई रही है। लेकिन वो योजनाएं किन क्षेत्रो और किन तालाबो में चल रही है ये शायद कोई नही जानता । हालांकि पिछले वर्ष रोशनाबाद ग्राम प्रधान की ओर से तालाब के एक कोने से अतिक्रमण हटाने के बाद अच्छी साफ सफाई करा दी गई थी। लेकिन कुछ समय पछ्यात लोगो ने फिर से तालाब को गंदा करना आरंभ कर दिया। जिस कारण अधिकतर ग्राम वासियों को इस गंदगी से परेशान होते देखा जा रहा है। अब बरसात आरम्भ हो चुकी है जिस कारण लोग ज्यादा परेशान है। उनका कहना है की जमा हो रहे इस कचरे ओर् कूड़े के ढेर से आस पास बदबू ओर बीमारी फैल सकती है। हालांकि कुछ लोग इस कूड़े को जलाकर नष्ट करने का प्रयास अवश्य करते है । लेकिन समस्या और भी ज्यादा गम्भीर तब हो जाती है जब इसी कचरे में पड़ी प्लास्टिक ओर पोलोथिन भी जलकर आस पास के पर्यावरण को दूषित करती है। अगर जल्द ही प्रसाशन या ग्राम प्रधान की ओर से इस समस्या का समाधान नही निकलता तो। आने वाली भारी वर्षा में लोगो का कथन सत्य हो सकता है।

तालाब एक ओर से पूरी तरह टूट चुका । जिसकी ओर किसी का ध्यान नही।पानी रुकना असंभव।

देखा जाए तो तालाब भरने के लिए लोग अक्सर बरसात का इंतजार करते है। तेज बारिश और बरसात में कुवे ओर तालाब भली भांति भर जाते है। लेकिन बरसात से कुछ समय पहले उन तालाबो की मरम्मत कर दी जाती है। जो किसी न किसी ओर से टूट जाते है। रोशनाबाद का ये एक मात्र तालाब पिछले लंबे समय से टूटा हुआ है। जिस कारण यहां पानी का संचय होना बिल्कुल असंभव है। जो तालाब की वर्तमान स्तिथि है उसे देखकर स्पस्ट हो जाता है। कि इस तालाब का कोई अस्तित्व नही है। तो यदि समय रहते ओर शीध्र ही इस बड़े तालाब की मरम्मत न कि गई ओर कोई समाधान न निकाला । तो बरसात का एक बूंद पानी भी इसमें इकट्ठा नही होगा। गाँव के अधिकतर पशु ओर जानवर इन तालाबो के माध्यम से ही प्यास बुझाते है। लेकिन अफसोस। कि पशु इनकी मरम्मत नही कर सकते

मनीष कुमार पाल

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