अटल बिहारी वाजपेयी को मुखाग्नि देने वाली नमिता कौन ?

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नवीन नेगी/कौशलेश पाल
बीबीसी संवाददाता/न्यूजलाइन24×7
17 अगस्त 2018

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का शुक्रवार को दिल्ली के स्मृति स्थल में अंतिम संस्कार कर दिया गया. उनकी अंतिम यात्रा में भारी जनसैलाब सड़कों पर उमड़ा.
देश के वीआईपी से लेकर आम लोग तक अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए दिल्ली की सड़कों पर मौजूद रहे.

वापजेयी को मुखाग्नि देने वाली एक महिला थी और इन महिला का नाम है नमिता भट्टाचार्य.
दरअसल, नमिता अटल बिहारी वाजपेयी की दत्तक पुत्री हैं. नमिता राजकुमारी कौल और प्रोफ़ेसर बी एन कौल की बेटी हैं, उन्हें वाजपेयी ने गोद लिया था.

नमिता कौल के पति रंजन भट्टाचार्य वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में ओएसडी (ऑफ़िसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) थे. उनका होटल का व्यवसाय भी रहा है.
वरिष्ठ पत्रकार विनोद मेहता अपने एक लेख में बताते हैं कि वाजपेयी जब प्रधानमंत्री थे उस दौरान पीएम दफ़्तर में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ब्रजेश मिश्र, प्रधानमंत्री के सचिव एनके सिंह के बाद तीसरे महत्वपूर्ण व्यक्त रंजन भट्टाचार्य थे.
विनोद मेहता लिखते हैं कि अटल अपनी बेटी और दामाद पर बहुत अधिक भरोसा करते थे. उनके प्रधानमंत्री रहने तक 7 रेस कोर्स में नमिता और रंजन की मज़बूत पकड़ थी.
आजीवन अविवाहित रहने वाले अटल बिहारी वाजपेयी का नमिता की मां राजकुमारी कौल के साथ रिश्ता हमेशा चर्चा में रहा, हालांकि वाजपेयी ने इस रिश्ते के बारे में कभी कुछ नहीं कहा…

लेख के मुताबिक जब वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तब राजकुमारी कौल, बेटी नमिता और दामाद रंजन के साथ पीएम आवास में ही रहती थीं.
‘मैं अविवाहित हूं पर ब्रह्मचारी नहीं’
अटल, हमेशा जो अपने राजनीतिक जीवन में किसी खुली किताब से महसूस होते थे, जिन्हें उनके विरोधी भी प्रेम भरी नज़रों और सम्मान से देखते थे.
उन्हीं अटल के निजी जीवन में या यूं कहें कि प्रेम रूपी खुशियों के आने और गुज़र जाने का सिलसिला उतना ही छिपा हुआ नज़र आता है.
अटल बिहारी वाजपेई ने शादी नहीं की. उनकी शादी से जुड़ा सवाल जब उनके सामने आया तो उन्होंने कहा था – ‘मैं अविवाहित हूं पर ब्रह्मचारी नहीं.’ एक ओजस्वी वक़्ता, कवि, आज़ाद भारत के एक बड़े नेता और तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने, क्या वो जीवनभर अकेले थे.

अटल का परिवार
अटल बिहारी वाजपेयी के ‘परिवार’ पर दबी ज़ुबान में हमेशा ही कुछ-ना-कुछ चर्चा होती रही, हालांकि इसका असर उनकी राजनीति पर कभी नहीं दिखा.
वाजपेयी का संबंध उनकी कॉलेज के दिनों की दोस्त राजकुमारी कौल के साथ हमेशा जोड़ा गया. दोनों ग्वालियर के मशहूर विक्टोरिया कॉलेज (रानी लक्ष्मीबाई कॉलेज) में साथ पढ़ते थे.
श्रीमती कौल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर बीएन कौल से शादी की.

अटल श्रीमती कौल के साथ-साथ उनके पति के भी गहरे दोस्त थे.
पुरानी यादों को टटोलते हुए अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार और प्रोफ़ेसर पुष्पेश पंत बताते हैं, ”पचास साल पहले मैंने दिल्ली के रामजस कॉलेज में पढ़ाना शुरू किया था. हॉस्टल के वॉर्डन प्रोफ़ेसर कौल थे. उन्होंने मुझे छोटा भाई मान कर सस्नेह मेरा मार्गदर्शन किया. छात्रों के लिए वह और श्रीमती कौल वत्सल अभिभावक थे.”
”वाजपेयी जी कौल दंपति के पारिवारिक मित्र थे. जब वह उनके यहाँ होते तो किसी बड़े नेता की मुद्रा में नहीं होते. छात्रों के साथ अनौपचारिक तरीक़े से जो कुछ पकता, वे मिल-बाँट कर खाते-बतियाते और ठहाके लगाते.”

जब प्रोफ़ेसर कौल अमरीका चले गए तो श्रीमती कौल अटल के निवास स्थान पर उनके साथ रहने आ गईं.
वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने तो श्रीमती कौल का परिवार 7 रेस कोर्स में स्थित प्रधानमंत्री आवास में ही रहता था. उनकी दो बेटियां थीं. जिनमें से छोटी बेटी नमिता को अटल ने गोद ले लिया था.
अटल और कौल ने कभी भी अपने रिश्ते को कोई नाम नहीं दिया. सैवी पत्रिका को दिए गए एक साक्षात्कार में श्रीमती कौल ने कहा, “मैंने और अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी इस बात की ज़रूरत नहीं महसूस की कि इस रिश्ते के बारे में कोई सफ़ाई दी जाए.”
अटल बिहारी के जीवन में श्रीमती कौल का कितना असर था इसका ज़िक्र हमें करन थापर की हाल ही में प्रकाशित किताब ‘डेविल्स एडवोकेट: द अनटोल्ड स्टोरी’ में मिलता है.
करन अपनी किताब में लिखते हैं, ”जब कभी भी मिस्टर वाजपेयी का इंटरव्यू करने के लिए अप्वाइंटमेंट लेना होता, तो हमेशा श्रीमती कौल से बात करनी पड़ती थी. अगर कौल एक बार इंटरव्यू का कमिटमेंट कर देतीं तो फिर अटल भी मना नहीं करते थे.”
अटल बिहारी वाजपेयी के पसंदीदा भोजन कौन से
साल 2014 में जब श्रीमती कौल का निधन हुआ तो उनके अंतिम संस्कार के लिए बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता जिनमें लाल कृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और रवि शंकर प्रसाद लोधी रोड पहुंचे थे.
श्रीमती कौल के निधन के कुछ दिन बाद बीबीसी ने उनकी दोस्त तलत ज़मीर से बात की.
उस वक़्त तलत ने कौल और अटल के रिश्ते की गहराई को कुछ यूं बताया था, ”वो बहुत ही ख़ुबसूरत कश्मीरी महिला थीं… बहुत ही वज़ादार. बहुत ही मीठा बोलती थीं. उनकी इतनी साफ़ उर्दू ज़ुबान थी. मैं जब भी उनसे मिलने प्रधानमंत्री निवास जाती थी तो देखती थी कि वहां सब लोग उन्हें माता जी कहा करते थे.”
”अटलजी के खाने की सारी ज़िम्मेदारी उनकी थी. रसोइया आकर उनसे ही पूछता था कि आज़ खाने में क्या बनाया जाए. उनको टेलीविज़न देखने का बहुत शौक़ था और सभी सीरियल्स डिसकस किया करती थीं. वो कहा करती थी कि मशहूर गीतकार जावेद अख़्तर जब पैदा हुए थे तो वो उन्हें देखने अस्पताल गई थीं क्योंकि उनके पिता जानिसार अख़्तर ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज में उन्हें पढ़ाया करते थे. वो जावेद से लगातार संपर्क में भी रहती थीं.”

अटल और श्रीमती कौल का रिश्ता एक बेनाम रिश्ता रहा, जिसके तमाम किस्से राजनीतिक गलियारों और पत्रकारों की नोटबुक में दर्ज हैं. अटल ने कौल की दूसरी बेटी नमिता को अपनी दत्तक पुत्री के तौर पर स्वीकार किया लेकिन श्रीमती कौल के साथ अपने रिश्ते पर हमेशा मौन रहे. रिश्ते के बारे में वे शायद इन अपनी इन पंक्तियों में सब कुछ कह गए…

जन्म-मरण अविरत फेरा
जीवन बंजारों का डेरा
आज यहाँ, कल कहाँ कूच है
कौन जानता किधर सवेरा
अंधियारा आकाश असीमित,प्राणों के पंखों को तौलें!
अपने ही मन से कुछ बोलें!

सौजन्य (बी बी सी हिंदी)

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