देवेश ठाकुर रचनावली का लोकार्पण संपन्न

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मुम्बई

रामनारायण रुइया स्वायत्त महाविद्यालय, माटुंगा, मुंबई के हिंदी विभाग तथा ‘समीचीन’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ कथाकार-समीक्षक देवेश ठाकुर जी को उनके रचनाशील जीवन के 85 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर ‘देवेश ठाकुर रचनावली'(16 खंड) का लोकार्पण भी किया गया

इस कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री विश्वनाथ सचदेव ने देवेेश जी के जीवन की अनेक घटनाओं का उल्लेख करते हुए उनके व्यक्तित्व की संंघर्षशीलता तथा धारदार लेखन में व्यक्त आशावादिता की चर्चा की। उन्होंने लेखन को देवेश जी की आदत में शुमार बताते हुए उनके शतायु होने की कामना की ताकि हिंदी साहित्य और अधिक समृद्ध हो सके।

विशेष अतिथि के रूप में लातूर से आए प्रख्यात आलोचक डॉ. सूर्यनारायण रणसुभे जी ने उनके बेबाक लेखन एवं दृृष्टि संंपन्ननता की प्रशंसा की। डॉ. राजम नटराजन ने उनके स्पष्टवक्ता होने तथा संबंधों के मामले में किसी मुगालते में न रहने का जिक्र किया। उन्होंने जनगाथा के जोशी के उदाहरण से बताया कि उनके अनेक पात्र हमारे इर्द-गिर्द के ही हैं जिन्हें देवेश जैसा लेखक ही लिख सकता है। डॉ. सतीश पांडेय ने उनके व्यक्तित्व और लेखन के विविध पक्षों से परिचित कराते हुए उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता तथा अन्याय और गलत के प्रतिकार की प्रवृत्तिका उल्लेख किया। धारवाड़ विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. शरेश चंद्र चुलकीमठ के लिखित मंतव्य को बेडेकर महाविद्यालय थाणे की प्राध्यापिका डॉ. जयश्री सिंह ने पढ़कर सुनाया।

डॉ. देवेश ठाकुर ने अपना मंतव्य प्रकट करते अपने जीवन के उतार-चढ़ाव से प्राप्त अनुभवों को अपने लेखन की प्रेरणा माना और इच्छा व्यक्त की कि अंत समय तक उनकी लेखनी इसी तरह सक्रिय रहे।

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. श्याम सुंदर पांडेय ने किया। डॉ. रोहिणी शिवबालन ने अतिथियों का स्वागत किया तथा प्राचार्या डॉ. अनुश्री लोकुर की अनुपस्थिति में उनका स्वागत-संदेश भी प्रस्तुत किया । रुइया महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण चंद्र बिष्ट ने सभी के प्रति आभार माना और भविष्य में इसी तरह के सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की । इस कार्यक्रम में डॉ. सूर्यबाला, सुधा अरोड़ा, जितेन्द्र भाटिया व डॉ. विजय कुमार जैसे रचनाकार तथा डॉ. बी सत्यनारायण (उस्मानिया विश्वविद्यालय), डॉ. पी एस पाटील (शिवाजी विश्वविद्यालय), श्रीमती कुसुमलता गोसाईं, नवभारत दैनिक पत्र के संपादक श्री केशर सिंह बिष्ट, मात्स्यिकी विभाग के निदेशक डॉ. राजेश्वर उनियाल, प्रसिद्ध रंगकर्मी हरिवंश, मुंबई के विविध महाविद्यालयों के प्राध्यापक, पत्रकार, , देवेश ठाकुर जी के संबंधी और मित्र तथा उत्तराखंडी सुधी साहित्य प्रेमी भारी संख्या में उपस्थित थे ।

शिवदिनेश शर्मा की रिपोर्ट

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