जानिए गोवर्द्धन पूजा की विधि और शुभ मुहूर्त

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🐄 दीपावली के अगले दिन (8 नवंबर) गोवर्द्धन पूजा की जाती है. इस दिन भगवान कृष्‍ण, गोवर्द्धन पर्वत और गायों की पूजा का विधान है.

🍱 यही नहीं इस दिन 56 या 108 तरह के पकवान बनाकर श्रीकृष्‍ण को उनका भोग लगाया जाता है. इन पकवानों को ‘अन्‍नकूट’ कहा जाता है.

🏔 मान्‍यता है कि इसी दिन भगवान कृष्‍ण ने देव राज इन्‍द्र के घमंड को चूर-चूर कर गोवर्द्धन पर्वत की पूजा की थी.

🌼 *_गोवर्द्धन पूजा – तिथि और शुभ मुहूर्त_*

प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 7 नवंबर – रात 9:31 बजे से.

प्रतिपदा तिथि समाप्‍त: 8 नवंबर – रात 9:07 बजे तक.

पूजा का प्रात: काल मुहूर्त : सुबह 6:39 से 8:52 बजे तक.

पूजा का सांयकालीन मुहूर्त: दोपहर 3:28 से शाम 5:41 बजे तक.

🙏🏻 *_गोवर्द्धन पूजा की विधि_*

🍁 इस दिन बलि पूजा, मार्गपाली आदि उत्सव भी मनाए जाते हैं.

🌻 आज गाय-बैल आदि पशुओं को स्नान कराके धूप-चंदन तथा फूल माला पहनाकर उनका पूजन किया जाता है. गौमाता को मिठाई खिलाकर उसकी आरती उतारते हैं तथा प्रदक्षिणा भी की जाती है.

💫 इस दिन गोबर से गोवर्धन की आकृति बनाकर उसके समीप विराजमान कृष्ण के सम्मुख गाय तथा ग्वाल-बालों की रोली, चावल, फूल, जल, मौली, दही तथा तेल का दीपक जलाकर पूजा और परिक्रमा की जाती है.

🍱 कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन भगवान के निमित्त भोग और नैवेद्य बनाया जाता है जिन्हें ‘छप्पन भोग’ कहते हैं.

🙌 अन्नकूट पर्व मनाने से मनुष्य को लंबी आयु तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है साथ ही दारिद्र्य का नाश होकर मनुष्य जीवनपर्यंत सुखी और समृद्ध रहता है.

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