जानें, विश्‍व की 7वीं सबसे बड़ी नौसेना की प्रमुख बातें

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4 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान हमारी नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत कराची बंदरगाह पर एक ही रात में उनकी तीन जलपोतों को नेस्तनाबूत कर डुबो दिया था. इस युद्ध में पाकिस्तान के 500 से ज्यादा नौसैनिक मारे गए थे. इस सफल अभियान की याद में हर साल चार दिसंबर को नौ सेना दिवस के रूप में मनाया जाता है.

जहाजों का बेड़ा

नौसेना के पास लड़ाकू विमान ले जाने वाला युद्धपोत आइएनएस विक्रमादित्य है. 11 विध्वंसक, 14 फ्रिगेट, 24 लड़ाकू जलपोत, 29 पहरा देने वाले जहाज, दो परमाणु पनडुब्बियों सहित 13 अन्य पनडुब्बियों और अन्य कई जलयानों की बड़ी फौज है.

प्रमुख बातें

नौसेना का नीति वाक्य है शं नो वरुण: इसका मतलब है कि जल के देवता वरुण हमारे लिए मंगलकारी रहें.

आजादी के बाद से नौसेना ने अपनी शक्तियों में लगातार इजाफा किया है. हमारे युद्धपोत और मिसाइलें समुद्र के नीचे, समुद्र के ऊपर और समुद्री सतह पर लक्ष्य भेद कर सकती हैं.

न सिर्फ तटों की रक्षा बल्कि नई तकनीक तैयार करने और आपदा के समय राहत कार्यों में भी नौसेना हमेशा आगे रहती है.

तीनों सेनाओं में मेक इन इंडिया का सिद्धांत सबसे पहले नौसेना ने ही शुरू किया. थल सेना व वायु सेना के मुकाबले नौसेना में अधिक स्वदेशी लड़ाकू उपकरण हैं.

भारतीय नौसेना आस्ट्रेलिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, फ्रांस, इंडोनेशिया, म्यांमार, रूस, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड, ब्रिटेन, अमेरिका व जापान के साथ युद्धाभ्यास करती है.

जापान और अमेरिका के साथ इस साल जुलाई में दक्षिण चीन सागर में किए गए मालाबार युद्धाभ्यास ने चीन की नींद उड़ा दी. यह भारतीय नौसेना की शक्ति का प्रतीक है.

महाशक्ति बनने की तैयारी

रूस में निर्मित परमाणु पनडुब्बी आइएनएस चक्र को 2021 तक भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा. 2027 के अंत तक भारतीय नौसेना में 150 पोत और 500 एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर शामिल होने का अनुमान है.

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