मर रही कान्हा हाउस की गायें, दिखावटी निरीक्षण मे सुर्खियां बटोर रहा जिला प्रशासन

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मर रही कान्हा हाउस की गायें, दिखावटी निरीक्षण मे सुर्खियां बटोर रहा जिला प्रशासन

बस्ती | जनपद मे जिला प्रशासन के अधिकारियों का महीने भर मे 4 से 5 निरीक्षण के हेडलाइन सुर्खियों मे आ ही जाते हैं | जिलाधिकारी शहर से करीब बने सरकारी गौशालाओं का निरीक्षण करने जाते रहते हैं, कभी कभी मंडलयुक्त भी अकेले निरीक्षण करने उसी शहर से कम ही दूरी पर बने गौशालाओं का निरीक्षण करते है या जिलाधिकारी व मंडलयुक्त एक साथ निरीक्षण कर लेते हैं |

जिला प्रशासन के गौशालाओं के निरीक्षण की दूसरे दिन की खबरों मे उनके निरीक्षण को बड़े – बड़े समाचार पत्र अचौक निरीक्षण बताते हैं | और हर बार अधिकारियों के इस अचौक निरीक्षण मे किसी भी तरह की कमियाँ व लापरवाही नही मिलती हैं ऐसा समाचार पत्र बताते हैं |

लेकिन जिलेभर मे गौशालाओं और उसकी व्यवस्था की सच्चाई कुछ और ही है | जिला प्रशासन जनपद के स्थानीय गौशालाओं व शहर के करीब कान्हा हाउस को छोड़ ग्रामीण क्षेत्रों मे बने कान्हा हाउस का निरीक्षण नही करते | न ही उसका अचौक निरीक्षण करते हैं |

जब वो उस गौशाला पर आते ही नही जहां कामिया हैं, गायें भूख से धूप मे पानी व चारे के अभाव मे एक के बाद एक रोजाना मर रही हैं तो कैसे मान लिया जाय की जिला प्रशासन का निरीक्षण अचौक था, या जिला प्रशासन गौशालाओं की व्यवस्था को लेकर गंभीर है या उनका केवल शहर के करीब गौशाला का निरीक्षण करना तटस्थ है | जब अधिकारी यहाँ आते ही नही तो बड़े अखबारों को मौका भी नही मिलता है अचौक निरीक्षण की हेडलाइन बनाने की | आखिर बड़े अखबारों को वजह भी तो चाहिए होता है साहब की लोकप्रियता बढ़ाने और उन्हे सुर्खियों मे लाने की | बड़े अखबरों का विज्ञापन मोह भी दुर्दशित गौशालाओं या कान्हा हाउस ही खबरों को छापने की हिम्मत नही जुटा पाता है |

बीते सप्ताहों मे कई पोर्टल्स और वेब मीडिया के पत्रकार साथियों ने इन दुर्दशित कान्हा हाउस और बेहाल गौशालाओं की बहुत अच्छी कवरेज भी की थी फिर भी जिला प्रशासन अचौक निरीक्षण करने ने तटस्थता नही दिखा पाया | एलेक्ट्रोनिक मीडिया या वेब मीडिया का कान्हा हाउस की सुधि लेने की भी एक बड़ी वजह है | वेब मीडिया के पत्रकार साथियो को विज्ञापन न के बराबर मिलते हैं इसलिए बहुत ज्यादा उनको विज्ञापन की उम्मीद भी नही होती है | वो कई खबरों को बड़े ही दमखम, बेबाकी व प्रमुखता से छापते हैं |

पिछले महीने रुधौली तहसील क्षेत्र मे कई गौशालाओं की बेहद डरावनी और मानवता को दुखित कर देने वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही थीं और खबरें भी यदा-कदा पोर्टल और चैनलस पर चल रही थी | तहसील क्षेत्र के सुरुवार मे बछड़ों की मौत हुयी थी जिससे आक्रोशित होकर ग्रामीणों व समाजसेवी लोगों ने मृत गायों व बछड़ों के शव का पोस्टमार्टम भी करवाने की मांग की थी, डॉक्टर ने रिपोर्ट मे बताया था कि बछड़े की मौत चारे व पानी के अभाव मे हुयी है | इसके अलावा तहसील क्षेत्र नकथरी मे बने गौशाला की गायों के मौत का क्रम ही नही बंद हो रहा है, यहाँ सप्ताह मे किसी न किसी गाय व बछड़े को मर ही जाना है बदहाली का शिकार होकर | गौशालाओं पर प्रतिमाह आने वाला सरकारी पैसा ग्राम प्रधान व अन्य जिम्मेदारों की सेवा मे लग जाता है | गौशाला पर तैनात किए गए सफाई कर्मचारियों को पशु सेवा नागवार गुजर रही है | तब भी जिला प्रशासन का ध्यान इन बेहाल गौशालाओं पर नही गया | जिला प्रशासन अब भी शहर के करीब गौशालाओं का निरीक्षण करके अचौक निरीक्षण वाली हेडलाइन से सुर्खियों मे आन पसंद कर रहा है | साथ ही पड़ोस के जिलों मे अचौक निरीक्षण की सुर्खियों द्वारा यह संदेश दे रहा है की बस्ती जनपद मे सब कुछ अच्छा है, कान्हा हाउस और गौशालाओं की व्यवस्था एकदम चकाचक है, और प्रशासन इसकी गंभीरता से ख्याल रखता है।
रिपोर्ट राम जनक यादव

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