उत्तर प्रदेश में दिव्यांग पेंशन घोटाला

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लखनऊ से लालचंद पाल की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश में दिव्यांग पेंशन के नाम पर हर माह 35 लाख रु. का घोटाला!

उत्तर प्रदेश का समाज कल्याण विभाग दिव्यांग पेंशन के तौर पर 17,000 लोगों को प्रति व्यक्ति 500 रुपये मासिक भेजता है। अब विभाग की ओर से मिले आंकड़ों के आधार पर छानबीन में सात हजार से ज्यादा लोग का पता नहीं चल पा रहा है।

लखनऊ के लिए बनी वोटर लिस्ट में सामने आए सात हजार से अधिक फर्जी पेंशनधारकडीएम कौशलराज शर्मा ने नगर निगम से हर जोन से दिव्यांग पेंशनधारियों की रिपोर्ट मांगी थीजोन चार में 558, जोन छह में 711 , जोन आठ में 689 और जोन एक में 704 पेंशनधारकों के नाम-पते की तस्दीक नहीं हो पा रहीसमाज कल्याण विभाग की तरफ से हर माह करीब 17 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को दिव्यांग पेंशन दी जाती है

दिव्यांग पेंशन के नाम पर हर माह समाज कल्याण विभाग से 500 रुपये मासिक पेंशन लेने वाले सात हजार से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल पा रहा है। इससे समाज कल्याण विभाग, जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर नगर निगम के अधिकारियों में खलबली मच गई है। समाज कल्याण विभाग की तरफ से हर माह करीब 17 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को दिव्यांग पेंशन दी जाती है। इसमें करीब सात हजार से ज्यादा लोगों के नाम-पता होने के बावजूद तलाशे नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में हर महीने 35 लाख रुपये तक की घोटाला की आशंका जताई जा रही है।

डीएम कौशलराज शर्मा ने नगर निगम से हर जोन से दिव्यांग पेंशनधारियों की रिपोर्ट मांगी थी। नगर निगम की तरफ से शुक्रवार को जिला प्रशासन को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार सभी आठ जोन में सात हजार से ज्यादा पेंशनधारक तलाशे नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि फर्जी नाम और अकाउंट आईडी के आधार पर हर महीने समाज कल्याण विभाग को करीब 35 लाख रुपये की चपत लगाई जा रही है।

अपर नगर आयुक्त अमित कुमार के अनुसार, फर्जी पेंशन लेने वालों की संख्या काफी ज्यादा हो सकती है। नगर निगम के एक अधिकारी के अनुसार, अब तक जोन चार में 558, जोन छह में 711 , जोन आठ में 689 और जोन एक में 704 पेंशनधारकों के नाम व पते की तस्दीक नहीं हो पा रही है। डीएम कौशलराज शर्मा के अनुसार वोटर लिस्ट मांगी गई है। अगर ऐसा है तो मामले की जांच करवाई जाएगी।

दरअसल, दिव्यांगों की वोटर लिस्ट और उनके लिए मतदान स्थल पर अलग से व्यवस्था करवाने के लिए सूची मांगी गई है। इसकी जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपी गई है। नगर निगम के पास स्वास्थ्य विभाग और समाज कल्याण विभाग से दिव्यांगों का ब्योरा भेजा गया है। समाज कल्याण विभाग से मिले आंकड़ों के आधार पर छानबीन में सात हजार से ज्यादा लोग का पता नहीं चल पा रहा है।

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