मधुमखी और मनुष्य एक नया अध्याय

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डॉ सुधीर तारे द्वारा दी गयी जानकारी

मधुमखी इनका निसर्ग ज्ञान बहुत ही व्यापक है और यह बात बहुत बार प्रमाणित भी हुआ है पहले से ही वन में रहने और वही से अपना गुजर बसर करने वाले आदिवाशी और गड़ेरिया, धनगर जिन्हें की अंतरराष्ट्रीय रूप से सेफर्ड समुद के नाम से जाना जाता है वे इस बात को हजारों वर्षा से जानते और उसका उपयोग भी किया करते थे लेकिन अब इस आधुनिक काल मे मधुमखियों के इसी ज्ञान का उपयोग अन्य कार्य के लिए किया जाने वाला है|

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मधुमखी और मनुष्य एक नया अध्याय

इंग्लैंड में इनका उपयोग चेरी और रस्पेबरी इन फलों पर होनी वाली फंगस की बीमारी को रोकने और उसका प्रतिकार करने के लिए किया जाता है बेलझियम की ब्योबेस्ट कंपनी ने ये तंत्रज्ञान खोजा और अब इस्तिमाल कर रही है|
मोंटाना युविर्सिटी के वैज्ञानिकों ने अब मधुमखी के शरीर पर चावल के दाने के आकार का एक रेडियो फ्रेक्वेंसी टैग लगाकर उससे युद्ध मे सैनिकों द्वारा दशम को रोकने के लिए बिछाय गए लैंडमाइन को खोजने के लिए प्रयोग किया जिसमें उन्हें सफ़लता भी प्राप्त हुई है तो अब ये मधुमखी प्रशिक्षित स्वानो के साथ मिलकर लैंडमाइन, भुसुरंग और ऐसे ही तमाम कार्य करने में इंसानों की मदद करेंगी|
इंग्लैंड के इन्सेंटिनेल नामक कंपनी ने मधुमखही के शरीर पर इन्फ्रेडड सेंसर लगाया और उन्हें विस्फोटक पदार्थ के समीप

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रोबीबी यानी कि रोबोटिक मधुमखी

भेजा जिससे कि एक अलार्म बजने लगा तो इस प्रयोग के सफल होने के पश्च्यात इनका उयोग बम को खोजने और उससे होने वाले नुकसान से इंसानों को बचाने में किया जा रहा है|

रोबीबी यानी कि रोबोटिक मधुमखी इस प्रोजेक्ट पर हावर्ड यूनिवर्सिटी कार्य कर रही है|
अफ्रीका और युगांडा में एक विशेष प्रजाति की मधुमखी ओ अवेसेता का इस्तिमाल खेतो को हाथियों के झुंड से बचाने के लिए किया जाता है|

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