ग्राम पंचायतें जमकर लगा रही शासन की योजनाओं को पलीता, घटिया निर्माण के बाद भी हो जाता है काम का सही मूल्यांकन

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ग्राम पंचायतें जमकर लगा रही शासन की योजनाओं को पलीता, घटिया निर्माण के बाद भी हो जाता है काम का सही मूल्यांकन

सरकार ग्रामीण स्तर पर काफी पैसा खर्च करती है और वह पैसा ग्राम पंचायत स्तर पर किया जाता है जिससे कि ग्राम पंचायत अपने अनुसार अच्छा काम कर सके और ग्राम को विकास की ओर बड़ा सके मगर नौगांव जनपद की ग्राम पंचायत चुरूवारी में सरकार की अनेकों योजनाओं को पलीता लगाया जा रहा है ग्राम पंचायतों में बन रही सीमेंट सड़कों से इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है की कितना भ्रष्टाचार चल रहा है लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि इन पंचायतों ने शासन की योजनाओं को पलीता लगाया जाता है और जिम्मेदार अधिकारी इन को नजर अंदाज करते आते हैं वही शासन द्वारा ग्राम पंचायतों में घटिया निर्माण होता है तो उसके लिए इंजीनियर सब इंजीनियर रखे हुए हैं जो कि घटिया निर्माण पर उचित कार्रवाई कर सकें मगर हालात कुछ और ही बयां करते हैं की पंचायतों में इतने घटिया निर्माण चल रहे हैं और उन कामों की शिकायत भी होती है लेकिन कार्यवाही कुछ नहीं होती नजर नहीं आती और उन पंचायतों के कामों का मूल्यांकन और cc जारी कैसे कर दी जाती है यह बात अधिकारियों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है साथ ही जनता की समझ नहीं आता की शिकायत करने के बाद भी आखिर मूल्यांकन और CC कैसे जारी हुई क्या बड़े अधिकारी भी इन घटिया निर्माण में शामिल रहते हैं तभी तो ग्राम पंचायतों में जमकर पलीता लगाया जा रहा है जन अपेक्षा है कि इस ओर शासन अपना ध्यान आकर्षण करें और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही हो जो शिकायत के बाद भी जांच नहीं करते और कामों का मूल्यांकन करते हैं,

मामला क्रमांक 2
विकासखंड कार्यालय सरकारी योजनाओं को लगा रहा पलीता

सरकार की योजनाओं को पलीता लगा रहे ब्लॉक कर्मचारी ब्लॉक मुख्यालय बना ग्राम योजनाओं के बंटाधार का केंद्र शिकायतों को चुनावी रंजिश बताकर किया जा रहा निष्कासित शाहाबाद भारत एक कृषि प्रधान देश है इसकी 60% आबादी आज भी गांव में बसती है इस बात को ध्यान में केंद्रित रखकर केंद्र और प्रदेश सरकारें ग्राम विकास के लिए नित नई योजनाएं चलाकर ग्रामों का विकास करना चाहती हैं मगर ब्लॉक अधिकारियों कर्मचारियों और सरपंच की तिकड़ी किस तरह इन योजनाओं को दीमक की तरह चाट रही है इसका प्रमाण नित्यप्रति ब्लॉक मुख्यालय पर आने वाले सरपंच और सेक्रेटरी की शिकायत से ही अंदाजा लगाया जा सकता है ब्लॉक के अधिकारी भी इन शिकायतों को चुनावी रंजिश बताकर निपटाने में महारत हासिल कर चुके हैं
1 माह पूर्व ग्राम पंचायत जोरन में हुए सीसी रोड के निर्माण में घटिया निर्माण का होना पाया गया था लेकिन अधिकारी बिना जांच पड़ताल किए ही राशि का मूल्यांकन कर देते हैं और कमीशन लेने में माहिर हैं यदि इन ग्राम पंचायतों की वास्तविकता में जांच की जाए इनके सारे काले कारनामे खुलकर शासन के सामने आ जाएंगे

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