‘गेटवे ऑफ इंडिया’ के 94 साल पूरे!

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गेटवे ऑफ इंडिया मुंबई की शान है. दक्षिण मुंबई में समुद्र तट के पास स्थित यह 26 मीटर ऊंचा द्वार है, जो प्रसिद्ध वास्तुशिल्पी जॉर्ज विंटेट की रहनुमाई में 1924 में बनकर तैयार हुआ.

क्यों और कब बनी ये ईमारत?

2 दिसंबर 1911 को पहली बार यहां आये ब्रिटेन के राजा रानी जॉर्ज पंचम और क्वीन मैरी का धन्यवाद करने और देश की व्यावसायिक राजधानी में समुद्री मार्ग के प्रवेश द्वार के तौर पर ‘गेटवे आफ इंडिया’ का निर्माण किया गया.

करीब एक दशक तक यह इमारत बनती रही और 1924 में पूरी तरह से बनकर तैयार हुई.

4 दिसंबर, 1924 को वायसराय, अर्ल ऑफ रीडिंग ने इसका उद्घाटन किया.

वास्तुकला की दृष्टि से

▪यह जमीन से 26 मीटर ऊंचा है और इसके गुंबद का व्यास 15 मीटर है.
▫इंडो सरासेनिक डिजाइन में बनी इस इमारत पर मुस्लिम स्थापत्य और गुजरात के स्थापत्य के स्टाइल का महत्व है.
▪पीली बेसाल्ट चट्टानों से इस इमारत का निर्माण हुआ है.
▫इसका निर्माण भारत के अंदर आने और बाहर जाने वाले दरवाजे के तौर पर किया गया था.
▪जब अंग्रेजों ने भारत छोड़ा तो उनका आखिरी जहाज यहीं से रवाना हुआ था.
▫इसका कुल बजट उस वक्त 21 लाख रुपये रखा गया था.

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