खजुराहो के जैन मंदिरों के बाहर जूते उतारने को लेकर विवाद

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छतरपुर  खजुराहो

विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह में शामिल जैन मंदिर परिसर में जूते उतारने को लेकर विवाद की स्थिति सामने आई है,और इस विवाद में भारतीय पुरातत्व विभाग,गाइड एसोसिएशन तथा श्री दिगम्बर अतिशय क्षेत्र जैन मंदिर प्रबन्ध समिति खजुराहो द्वारा थाना खजुराहो में शिकायत दर्ज कराई गई है

दरअसल खजुराहो के जैन मंदिर परिसर में इसी वर्ष जैन मुनि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का मुनिसंघ सहित चातुर्मास कार्यक्रम सम्पन्न हुआ,उक्त अवसर पर आचार्यश्री द्वारा सहस्त्रकूट जिनालय का निर्माण शुरू करके इसी स्थल को स्वर्णोदय तीर्थ का नया नाम भी दिया गया है

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उक्त बृहद कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर के बाहर जूते चप्पल उतारने की प्रक्रिया अस्तित्व में थी साथ ही चमड़े का बेल्ट,पर्स आदि भी अंदर ले जाना प्रतिबंधित था,अब जब कार्यक्रम सम्पन्न हो गया और आचार्य श्री के यहां से जाने के पश्चात अब इस प्रकिया पर विवाद सामने आ गया है,जब स्थानीय गाइड विदेशी पर्यटकों के साथ स्मारकों का भ्रमण कराने जैन मंदिर परिसर में चातुर्मास कार्यक्रम के पूर्व की भांति जूते चप्पल पहनकर परिसर में जाने की जिद पर अड़ गए तो वहीं जैन मंदिर प्रबन्ध समिति के लोगों द्वारा गाइडों तथा देशी-विदेशी पर्यटकों को जूते तथा चप्पलें उतारकर ही अंदर प्रवेश करने को कहा गया

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घटना 20-12-2018 को लगभग 1.30 बजे दोपहर की है जब फ्रेंच गाइड विनोद कुमार सेन फ्रांस के पर्यटकों को लेकर जैन मंदिर का अवलोकन कराने जूते पहनकर जाने का प्रयास करने लगे तो वहीं पास बैठे प्रबंध समिति के लोगों से झूमा झपटी,गाली गलौच सहित विवाद हो गया जिसकी दोनों पक्षों द्वारा थाना खजुराहो में लिखित शिकायत दर्ज कराई,
इसी विवाद को लेकर गाइड एसोसिएशन के सदस्यों द्वारा भी शिकायत थाने में दी गई,

इसी तरह के एक और मामले पर इसी दिन शाम लगभग 5 बजे जैन मंदिर परिसर में तैनात भारतीय पुरातत्व विभाग के सुरक्षा कर्मी मोहन लाल गौतम का भी प्रबंध समिति के लोगों से विवाद हो गया जहां से गौतम को उनकी मोटरसाइकिल सहित परिसर से बलपूर्वक बाहर तक कर दिया गया,

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उक्त प्रकरण को लेकर भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा एक लिखित शिकायत थाना खजुराहो में दी गई है जिसमें उनके विभाग द्वारा संरक्षित जैन मंदिर स्मारकों की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा कर्मियों को ड्यूटी से रोका जा रहा है,इधर प्रबन्ध समिति के द्वारा बताया गया कि आचार्यश्री के रहने के दौरान ये सिद्ध क्षेत्र हो गया है और भगवान आदिनाथ तथा पार्श्वनाथ के मंदिर आस्था,भक्ति,पूजा,आराधना के प्रतीक स्थल है,इसलिए हमारी धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखकर जूते, चप्पल उतारने चाहिए।

वहीं गाइडों का तर्क है कि खजुराहो के पूर्वी मंदिर समूह में जैन मंदिरों के अलावा भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित स्मारकों तक प्रदत्त अधिकारों के तहत भारत सरकार से मान्यता प्राप्त गाइड जूते पहन कर जाते रहे हैं,परन्तु जैन मंदिर प्रबंध समिति अब चाहती है कि गाइड मंदिर परिसर से पहले जूते उतार कर जाए,जबकि गाइड जहां जहां जूते उतारने के पट लगे है वहां हमेशा ही नियमों का पालन करते हुए जूते उतारते रहे हैं

,लेकिन समिति द्वारा शासन की व्यवस्थाओं के विपरीत जाकर अब निजी तौर पर नए नियम बनाकर व्यवधान उत्पन्न किये जा रहे हैं जिसका खुले रूप में हम सभी गाइड बिरोध करते हैं ये सब असुविधा जनक है 48 डिग्री तापमान में भला कोई भी नंगे पैर अवलोकन नही कर सकता है साथ ही भारतीय पुरातत्व विभाग मंदिर किसी भी धार्मिक सामाजिक मान्यताओं के विपरीत होकर संरक्षण हेतु भारतीय पुरातत्व विभाग के नियम कानून के अधीन होते हैं।

अब देखना है कि ये टकराव की स्थिति कहीं धार्मिक मुद्दे का रूप न लेले इसके पूर्व प्रशासन इसका कोई समय रहते समाधान निकलता या नहीं।
जब हमने इस मामले पर भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया।

शिकायतें आई हैं हम जांच कर रहे हैं कानून के तहत कार्यवाही की जाएगी……रावेन्द्र सिंह बागरी थाना प्रभारी खजुराहो

विनोद मिश्रा

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