बाबूजी नही रहे, छोड़ गए कुछ सपने पूर्ण करने के लिए

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दिवंगत गड़ेरिया नेता हरिओम पाल

वारणाशी

दिनांक 18 सितंबर 2018

आज शाम को काशी का लाल काशी की माटी में समा गया ! नाम था हरि ओम पाल धनगर !

लोगों को वह सम्मान वश बाबू कहा करते थे ! एक दौर आया कि लोग उन्हें सम्मान वश बाबूजी कहने लगे ! आज उन्हीं बाबू जी की अंतिम जीवन यात्रा थी ! चाँद पुर के उनके आवास से हरिश्चंद्र घाट तक लोग पैदल ही उनकी अंतिम यात्रा शामिल हुए !

काशी में उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों का हुजूम टूट पड़ा ! ! लोगों ने भावुक होकर कहा कि , बाबू जी आप याद किए जाओगे निर्विवाद सामाजिक नेता के रूप में ! समाज की राजनैतिक बेल को पल्लवित करने वाले नेता के रूप में ! उत्तर प्रदेश ही नहीं अन्य राज्यों में भी आप अपनी वाणी से लोक मानस में बढ़िया छवि गढ़ गए !

हरिओम पाल की अंतिम यात्रा

आपके निधन से पहले चौकीदार को किसी ने बताया था कि , रा स पा नेता महादेव जानकर ने कहा है कि , बाबू जी अगर आप काशी से प्रस्थान कर लोगे तो मैं आपका पुतला लगा कर उत्तर प्रदेश में राजनीति करूंगा ! अब आप मरोगे नहीं , लोगों के दिलों में जिंदा रहोगे ! होनी को कोई नहीं टाल सकता ! शायद महादेव को अपने हरिओम के जाने की आहट मिल गईं थी !

अब महादेव जानकर को अपना वादा निभाना होगा और उनके राजनैतिक चेले सुशील पाल को भी गुरु दक्षिणा देनी होगी !जीवन के अंतिम समय में स्व.हरिओम जी के सबसे करीब राजनैतिक रूप से रा स पा महा सचिव सुशील पाल रहे ! वह चौकीदार की नजर में उनके राजनैतिक वारिश भी हैं ! कभी , कभी समय इस तरह के खत बनाता चलता है ! लोग बन रहे होते हैं , जाने , अनजाने में लोग गढ़ रहे होते हैं ! समय तय कर देता है कि , कौन , कब, किस भूमिका में होगा ? ? ?

चौकीदार विवेक पाल की अश्रुपूरित कलम से श्रद्धांजलि

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