उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई व्यवस्थाओं को नहीं मानते तहसीलदार मिश्रित

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Arrangements made by Supreme court do not believed by the Tahsildar
उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई व्यवस्थाओं को नहीं मानते तहसीलदार मिश्रित

शासन के दिशा निर्देश और मा . उच्चतम न्यायालय द्वारा दी गई व्यवस्थाओं को नहीं मानते तहसीलदार मिश्रित ।

मिश्रित – सीतापुर /प्रदेश शासन द्वारा जनहित में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देने के लिए जहां नित नई नई कवायदें की जा रही हैं वहीं यहां का तहसील प्रशासन अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए प्रदेश शासन व मा. उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय द्वारा जनहित में जारी ब्यवस्थाओं को दरकिनार कर मनमानी कार्यशैली से सभी कार्यों को अंजाम दे रहे हैं जिससे तहसील मिश्रित के राजस्व विभाग में अंधेर नगरी चौपट राजा वाली कहावत पूरी तरह से चरितार्थ हो रही है गौरतलब हो कि तहसील मिश्रित के राजस्व विभाग में तैनात तहसीलदार चन्द्रभान राम प्रदेश शासन के दिशा निर्देशों से इतर होकर मनमानी कार्यशैली को अंजाम दे रहे हैं वहीं मा . उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय द्वारा जनहित में जारी व्यवस्थाएें भी उनकी स्वार्थ सिद्धी के आगे कुछ मायने नहीं रखती हैं ज्ञातब्य हो कि ग्राम पंचायत नरसिघौली के मजरा किशनपुर में चकबंदी के समय से राजस्व अभिलेखों में छूटी चली आ रही मतरूक गाटा सं .1372 रकबा 0. 210 हे . के शंसोधन को लेकर न्यायालय में बिना वाद संचालित किए ही स्वार्थ सिद्धी करने हेतु निजी ताकत के प्रयोग से खेतौनी पर दर्ज करने का आदेश दे दिया तहसीलदार राजस्व ने अपने आदेश मे उल्लेख किया है कि ग्राम पंचायत नरसिघौली की खाता सं.302 की गाटा सं .312 रकबा 0.210 हे . जो जिल्द बन्दोवस्त सी.एच .45 बाग सं . 269 के आधार पर तहसीलदार मिश्रित के आदेश 22 मई 018 के क्रम में गाटा सं .1312 के स्थान पर गाटा सं. 1372 दर्ज हो तहसीलदार मिश्रित जबकि यह गाटा जिल्द बन्दोबस्त पर दूसरे ब्यक्ति के नाम अंकित है वहीं तहसीलदार ने आदेश दूसरे लोगों के नाम आदेश करके खेतौनी पर अंकित करा दिया है चकबन्दी के समय से मतरूक चली आ रही गाटा सं . का न्यायालय में बिना वाद संचालित किये ही निजी ताकत से यह आदेश किया गया है जबकि कानून के जानकार तहसील के अधिवक्ता बताते हैं कि तहसीलदार की न्यायालय में इस मतरूक गाटा सं .1372 के संशोधन हेतु धारा 33 / 39 का वाद संचालित होना अनिवार्य था और न्यायालय में सभी अभिलेखों का सत्यापन करते हुए गवाह आदि के बयान पर आदेश करना प्रभावी था परन्तु ऐसा नही किया गया भू स्वामियों से एक सिकायती प्रार्थना पत्र लेकर अपनी निजी ताकत का प्रयोग करके नियम बिरुध्द मतरूक खेतौनी का संसोधन कर दिया जो न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया के विरुद्ध माना जा रहा है वहीं यह आदेश प्रभावी न होकर निरस्त होने योग्य भी बताया जा रहा है तहसील क्षेत्र के तमाम नागरिकों का आरोप है कि तहसीलदार की मनमानी कार्य शैली काबिले तारीफ नही है इनके न्यायालय में भूमि विवाद के सैकड़ों वाद संचालित हो रहे है उन पर भी तहसीलदार अपनी मनमानी कार्य शैली का असर डाल सकते है इस लिए यहां के सभी नागरिकों ने जिला प्रशासन व प्रदेश शासन का ध्यान इस गंभीर मामले की ओर आकर्षित कराते हुए तहसीलदार द्वारा नियम बिरुध्द किये गये आदेश को निरस्त कराने तथा तहसीलदार पर प्रशासनिक कार्यवाही करने की मांग की है ।

रिपोर्ट श्रवण कुमार मिश्र

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