हौसला अफज़ाई ख़ातिर ग़ज़ल : देवेंद्र निडर

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” हौसला अफज़ाई ख़ातिर ग़ज़ल ”
शोहरत गर है पाना तो बन्दे हुनर पैदा कर ।
मेहनत  के  बलबूते  तू असर  पैदा  कर।
इस कायनात में गर मीठे फल है  खाने।
तो जिन्दगी में बेहतरीन शज़र पैदा कर।
कोई कुछ  कहे पर कच्चे कान मत बन।
दोस्त के दीदार  ख़ातिर नज़र पैदा कर।
मुसीबत  कितनी भी आये फर्ज़े राह में।
तू उसे सहन  करने  का सबर पैदा कर ।
सराफत न डगमगाये कभी इस फानी में।
ईमानी कामों से तू पक्की मुहर पैदा कर।
गर  सूरज  की  तरह चाहते हो चमकना।
तो   तम  मिटाने  की  किरन  पैदा  कर।
जरायम के जहां से गर चाहते हो टकराना।
तो ‘निडर’ जैसा फौलादी जिगर पैदा कर।
देश समाज का यदि भला चाहते हो बढ़िया।
तो हरेक बच्चे को पढ़ाने की जुर्रत पैदा कर।
मुल्क को मालामाल बनाते रहो मेरे अदीब।
हर वक़्त हुब्बलवतनी की बहर पैदा कर।
ज़िन्दगी  ख़ौफ  का  अक़्श  है  मेरे  दोस्त।
इसलिए  हर  घर  में  तू  ‘निडर’  पैदा  कर।
———-देवेन्द्र कश्यप ‘निडर’
साहित्यकार , सामाजिक चिंतक
शिक्षाविद् , संस्थापक – मिशन
महापुरुष मूवमेंट मंच ( एम ४ )
ग्राम – अल्लीपुर , पत्रालय – कुर्सी
तहसील – सिधौली , ज़िला – सीता
-पुर , राज्य – उत्तर प्रदेश पिन कोड
– २६१३०३ , मो .९६२१५७५१४५

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