हरियाणा में महिलाओं का बुरा हाल

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18 अगस्त 2018
हरियाणा÷【संजय पांचाल】

हरियाणा में महिलाओं का हाल बहुत बुरा है। ये हम नहीं एक सर्वे कह रहा है। बिहार और झारखंड की तरह हरियाणा में भी लड़कियों तथा महिलाओं का स्वास्थ्य अच्छा नहीं है। वह बाकी राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा कुपोषण की शिकार हैं। सर्वे में 40 फीसदी लड़कियों का वजन कम पाया गया, जबकि 60 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया (खून की कमी) की शिकार मिलीं।

देश में लैंगिक संवेदनशीलता (जैंडर वलनरैबिलिटी) पर प्लान इंडिया द्वारा किए गए सर्वे में यह तथ्य उजागर हुए हैं। यह रिपोर्ट 170 सूचकों (इंडीकेटर्स) पर सभी राज्यों से लिए गए डाटा के आधार पर तैयार की गई। देश के 29 राज्यों व 7 केंद्र शासित प्रदेशों में गरीबी के मामले में हरियाणा का स्थान 17वां, महिलाओं व लड़कियों को सुरक्षा उपलब्ध कराने में 21वां, शिक्षा में 12वां और स्वास्थ्य में 26वां है।

इन ग्रुपों को मिलाकर तैयार किए गए जैंडर वलनरैबिलिटी इंडैक्स (जी.वी.आई.) में हरियाणा 19वें स्थान पर है, जबकि सबसे खराब स्थिति बिहार की है, जिसका नम्बर 30वां है। सबसे बेहतर और पहले स्थान पर गोवा है। सुरक्षा के संबंध में अध्ययन कहता है कि हरियाणा में 18.5 फीसदी लड़कियां आज भी शादी की कानूनी उम्र से पहले ही ब्याह दी जाती हैं। 32 फीसदी शादीशुदा महिलाओं को कभी न कभी अपने पति की हिंसा का सामना करना पड़ा है। प्रोटैक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सैक्सुअल ऑफैंस (पोक्सो) कानून के तहत दर्ज मुकद्दमों में 97.8 फीसदी लड़कियां ऐसी हैं जो अपराधी को जानती हैं।

शिक्षा के मामले में पाया गया कि 45.8 फीसदी महिलाओं ने 10 या उससे अधिक वर्षों तक औपचारिक शिक्षा हासिल की। हरियाणा में तकरीबन 46.4 प्रतिशत महिलाएं शिक्षित हैं, जबकि देश में 10 में से 7 शिक्षित हैं। हालांकि 99.6 फीसदी स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय हैं लेकिन इसमें से 82.3 प्रतिशत ही इस्तेमाल लायक हैं।

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