सफाई कर्मी बने मुन्ना भाई एमबीबीएस तो कैसे होगी गांव की सफाई।

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सफाई कर्मी बने मुन्ना भाई एमबीबीएस तो कैसे होगी गांव की सफाई।

मिलीभगत कर तैनात सफाईकर्मी चला रहा हास्पिटल,सफाई व्यवस्था रामभरोसे

बिकता हर कोई है कीमत लगाने वाला चाहिए

मेंहदावल,संतकबीरनगर। भारत सरकार एक तरफ जहां ग्रामीण आबादी को पूरी तरह से स्वच्छ रहने के लिए प्रेरित कर रही है। जिसके लिए स्वच्छ भारत मिशन जैसे योजना के क्रियान्वयन पर पूरी तरह से अपनी नजर को केंद्रित कर रही है। जिसके लिए पंचायत राज विभाग द्वारा ग्राम ग्राम सफाईकर्मियों को स्वच्छ रखने के लिए जिम्मेदारी दी गई है और इस मद में अरबो रुपये वेतन के रुप मे खर्च कर रही है। फिर भी कुछ सफाईकर्मी अपने कर्तव्य को पूर्ण करने में घोर लापरवाही बरत रहे है। ताजा मामला मेंहदावल विकास खंड के बरईपुर ग्रामपंचायत का है। जहां पर ग्रामीणो के द्वारा बताया गया कि दो सफाईकर्मी सफाई व्यवस्था के लिए तैनात है। जिनमे से एक सफाईकर्मी का नाम गणेश और दूसरे सफाईकर्मी का नाम भास्कर द्विवेदी बताया गया। जहां गणेश द्वारा अपने ग्राम पंचायत में आये दिन सफाई कार्य को निपटाया जाता है। वही पर दूसरे सफाईकर्मी के द्वारा कभी भी ग्रामपंचायत में सफाइकार्य के लिए उपलब्ध नही पाया गया। इसीबाबत ग्राम निवासी रामकिशुन, रामराज आदि लोगों का कहना है कि कभी भी ग्राम में हमने दूसरे सफाईकर्मी भास्कर द्विवेदी को नही देखा। इसके साथ ही ग्रामपंचायत के पलकधारी, संतराज, बैजू, राधेश्याम, सुरेंद्र, लाल जी, प्रकाश, राम जी आदि ने विरोध प्रदर्शन करते हुए नाराजगी व्यक्त किया। इस बाबत जब कुछ मीडिया कर्मियों ने इस सफाईकर्मी के बाबत गहनता से जानकारी किया तो इनके द्वारा पाया गया कि सफाईकर्मी भास्कर द्विवेदी गोरखपुर जनपद के पीपीगंज कस्बे में एक अस्पताल में डॉक्टर के पद पर सुशोभित है। जिसके बाबत इस गोलमाल को उजागर करने हेतू एक स्टिंग में एक पत्रकार द्वारा बीमार बनकर डॉक्टर से जांच करवाकर बकायदा दवा पर्ची पर दवा भी लिखवाई गई। जिसके बाद ही इस बाबत सारी जानकारी मिल पाई। जिसके बाद मीडिया कर्मियों द्वारा इस उपरोक्त सफाईकर्मी कम डॉक्टर से पूछताछ किया गया तो इन डॉक्टर साहब द्वारा बताया गया कि हमारे द्वारा जिम्मेदार अधिकारी एवं ग्रामप्रधान को पैसा दिया जाता है। जिससे मुझे सफाई कार्य न करना पड़े। एक सफाईकर्मी के बाबत ग्रामप्रधान भी संदिग्ध के घेरे में आते है। अगर सफाइकार्य हेतु सफाईकर्मी नही आता था तो सफाईकर्मी के रजिस्टर और पैरोल भरा जाता रहा है। सभी बातों से साफ हो चुका था कि तैनात सफाई कर्मी का हॉस्पिटल चलाकर डॉ बन बैठा है वहीं सरकार के महत्वपूर्ण योजना योजना पर तैनात सफाई कर्मी द्वारा पलीता लगाए जाने का काम भी किया जा रहा है हालांकि पूरे मामले पर जब एडीओ पंचायत मेहदावल मैनुद्दीन सिद्दीकी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है यदि इस तरह की लापरवाही पाई जाती है तो कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में सरकारी तंत्र पर भी सवाल उठ रहा है कि जहां एक तरफ ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से तैनात सफाई कर्मी सफाई का कार्य ना करके हस्पिटल चला रहा है और सरकार इसके लिए बकायदा मासिक वेतन तय कर रखी है तो आखिर क्या बंदर बांट कर हर कोई अपने अपने हिस्से में लगा हुआ है। और सबसे बड़ा सवाल तो यह उठ रहा है कि समय-समय पर निरीक्षण और जांच में अब तक संबंधित अधिकारियों ने कैसे कांजीवरम को पूरा किया और तैनात सफाई कर्मी ने अपना जुगाड़ किन-किन अधिकारियों तक सेट कर रखा है। फिलहाल या तो जांच का ही विषय है। अब देखना यह होगा कि मामला प्रकाश में आने के बाद संबंधित अधिकारी कितना कार्रवाई करते हैं या फिर सफाई कर्मी के जुगाड़ के आगे नरपत हो जाएंगे।

रिपोर्ट राम बेलास प्रजापती

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