शब्द साधना साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था का शुभारंभ।

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  1. शब्द साधना साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था का शुभारंभ। भोपाल /

    संवाददाता चंद्रशेखर प्रजापति

    भोपाल। (मध्य प्रदेश) पड़ने लगती है पियूष की शिर पर धारा।
    हो जाता है रुचिर ज्योति मय लोचन-तारा।
    बर बिनोद की लहर हृदय में है लहराती।
    कुछ बिजली सी दौड़ सब नसों में है जाती।
    आते ही मुख पर अति सुखद जिसका पावन नामही।
    इक्कीस कोटि-जन-पूजिता हिन्दी भाषा है वही। यह बात शब्द साधना साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था के स्थापना दिवस पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संस्था अध्यक्ष डॉ विनीता प्रजापति ” वेदान्शी ” ने कही आगे उन्होंने बताया एक डोर में सबको जो है बाँधती
    वह हिंदी है, ऐसे में शब्द साधना एवं सांस्कृतिक संस्था हिंदी भाषा के उत्थान के लिए व हिंदी प्रेमियों के लिए शुभ शकुन होगी। और अनीता प्रजापति ने संस्था उददेश्यो एवं कार्यो को संस्था के पदाधिकारियों को अवगत कराया तथा आगामी कार्यक्रम की रूपरेखा भी तैयार की। कार्यक्रम स्थल रेखांकन ललित कला अकादमी के सभागार में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ जिसमें संस्था पदाधिकारियों एवं साहित्यकारो ने नव वर्ष का स्वागत करते हुऐ अपनी रचनाएं पढी। कार्यक्रम के आरंभ के सदस्यों ने संस्था के उददेश्य श्रेष्ठ विचार श्रेष्ठ कर्म का संकल्प लिया और नव वर्ष मे कुछ नया कर गुजर जाने की प्रेरणा । कार्यक्रम दीप प्रज्वलित कर सुश्री सुनीता पटेल के द्वारा सरस्वती वंदना के साथ प्रारम्भ हुआ। संस्था संरक्षक डा रेखा भटनागर ने अपना उदबोधन दिया। साथ ही उपाध्यक्ष श्रीमती मनीषा प्रजापति एवं सुनीता पटेल ने अपने विचार व्यक्त किये। श्रीमती सोनिया श्रीवास्तव एव सारिका ताम्रकार एवं हेमन्त प्रजापति ने अपने विचारों से अवगत कराया एव उसके बाद काव्य पाठ किया गया। साथ ही कुछ नयी नियुक्तिया की गयी। श्रीमती बोधमिता श्रीवास्तव को मिडिया प्रभारी नियुक्ति किया गया एवं हेमन्त प्रजापति को सह सचिव नियुक्त किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन सुश्री सुनीता पटेल ने किया एवं अन्त में श्री मती सोनियां श्रीवास्तव ने सबका आभार व्यक्त किया।

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