रसूलपनह अति प्राचीन मानेश्वर महादेव धाम हैं इस मंदिर की गिनती अति प्राचीन मंदिरों…

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रिपोर्ट राम लखन

अटरिया/ सीतापुर विकासखंड सिधौली से 10 किमी स्थित रसूलपनह अति प्राचीन मानेश्वर महादेव हैं इस मंदिर की गिनती अति प्राचीन मंदिरों में की जाती है मंदिर आज भी गांव के किनारे बरगद के पेड़ों के मध्य आबादी से दूर बना होने के चलते अपनी ओर श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है सावन महीने मैं यहां शिव भक्तों का दर्शन करने के लिए ताता लगा रहता है शिवभक्त आकर इस मंदिर पर माथा टेकते हैं वह अपनी मनोकामना भगवान से मांगते हैं रसूलपनह निवासी पंडित शुक्ला ने बताया की इस मंदिर का इतिहास मनवा के किले से जुड़ा है सीतापुर जिले में विख्यात मनवा का टीला एवं मानेश्वर महादेव है जो सैकड़ों वर्ष पुराने है मंदिर पर शिव भक्त महीनों गुजारते मनवा के राजा मांधाता के नाम से प्रचलित मनवा का टीला जिस पर आज भी मनुष्यों के अवशेष प्राप्त होते हैं।

मंदिर का इतिहास
तहसील सिधौली के अटरिया क्षेत्र की मनवा के मजरे रसूलपनह उत्तर-पश्चिमी में मानेश्वर मंदिर का निर्माण तत्कालीन राजा मांधाता द्वारा 27 सौ वर्ष पूर्व करवाया था जबकि गांव के दूसरी ओर पूर्व दक्षिण में राजा किले के अवशेष विद्वान हैं जो पुरातत्व विभाग के अधीन है किला ऐतिहासिक एवं पौराणिक कथाओं में शामिल भी है इस किला पर भी एक टंकेश्वर महादेव के नाम से प्रचलित है वहीं भी लगभग 29 सौ वर्ष पुराना है जिस पर आज भी रखीं मुर्तियां कुछ अलग ही आकर्षित होती है और मंदिर की प्राचीनता का प्रमाण भी है गांव के बुजुर्ग लोग आज भी बताते हैं कि अंग्रेजों के जमाने में यहां पर भी मुगल शासक था मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिरों को ध्वस्त करने की मंशा इस मंदिर पर भी हमला कर यहां रखी मूर्तियों का खंडित कर गड्ढे में रखवा दिया था जिस पर कालांतर में विशाल बरगद का पेड़ गाया जिस की जड़ो में फंसकर खंडित मूर्तियां आज भी बाहर आती रहती है इस मंदिर के समीप राजा मांधाता नी एक तालाब का भी निर्माण करवाया था जो आज भी विद्यमान है और श्रद्धालुओं द्वारा विगत वर्ष इसका जीर्णोद्वार कर भव्यता प्रदान कर सफल प्रयास किया गया था मंदिर का पूर्ण फीट ऊंचा शिवलिंग विशेष प्राचीन वस्तु कला से निर्मित है जो श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी माना जाता है सावन के माह में इस आस्था के केंद्र पर दूर दराज से शिवभक्त आकर अपनी मनोकामना पूर्ण करते हैं।

तैयारियां
सावन माह में भारी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए मंदिर प्रबंध समिति व श्रद्धालुओं के सहयोग से विशेष सफाई व्यवस्था रखी जाती है मंदिर के पास ही समिति द्वारा कमली का निर्माण भी करवाया गया है जिसमें सिद्ध सन्यासी आकर ठहरते हैं और महीनों साधना में लीन हो जाते हैं ।

श्राद्वालु
विमल शुक्ला ने बताया कि मंदिर के सरोवर में स्नान करने के तत्पश्चात सच्चे मन से मांगी गई मुराद भोले बाबा अपने मानेश्वर के नाम के अनुरूप अवश्य पूर्ण करते हैं व श्रद्धालु पुनीत शुक्ला ने बताया कि भोले बाबा हर भक्तों की मनोकामना पूर्ण करते हैं ।

पुजारी
पुजारी लालजी गुसाईं ने बताया कि प्राचीन मंदिर होने के चलते मानेश्वर महादेव के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था है वही मनसे भोले बाबा की पूजा अर्चना करने से श्रद्धालुओं की मनोकामना पूरी होती है

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