योग मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा को उर्जा, ताकत और सौन्दर्य प्रदान करता हैं  : डॉ विपिन सिंह। 

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  • योग मनुष्य के शरीर, मन और आत्मा को
    उर्जा, ताकत और सौन्दर्य प्रदान करता हैं  : डॉ विपिन सिंह।
  •  संवाददाता  चन्द्रशेखर प्रजापति
                  उन्नाव/ सफलता तीन चीज़ो से मापी जाती हैं
  • धन, प्रसिद्धी और मन की शांति
    धन और प्रसिद्धी पाना आसान हैं
    “मन की शांति” केवल योग से मिलती हैं यह बात डॉक्टर विपिन सिंह ने बीएड संकाय के योग शिविर में बीएड छात्राध्यापकों को संबोधित करते हुए डीएसएन कॉलेज उन्नाव में कहीं आगे उन्होंने बताया  ‘ यदि शरीर व मन स्वस्थ नही हैं
    तो लक्ष्य को पाना असम्भव हैं
    योग करने से मन और शरीर दोनों स्वस्थ होते हैं। योग एक कला है जो हमारे शरीर, मन और आत्मा को एक साथ जोड़ता है और हमें मजबूत और शांतिपूर्ण बनाता है। योग आवश्यक है क्योंकि यह हमें फिट रखता है, तनाव को कम करने में मदद करता है और समग्र स्वास्थ्य को बनाए रखता है और एक स्वस्थ मन ही अच्छी तरह से ध्यान केंद्रित करने में सहायता कर सकता है।  डॉक्टर विपिन सिंह ने ताड़ासन की मुद्रा में शिविर में उपस्थित छात्र अध्यापकों को उसके फायदे बताते हुए कहा ताड़ासन योग की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। यह पूरी शरीर को लचीला बनाता है और साथ ही साथ कड़ा एवं सख्त होने से रोकता है। यह एक ऐसी योगासन है जो मांसपेशियों को ही नही बल्कि सूछ्म मांसपेशियों को भी बहुत हद तक लचीलापन बनाता है। और इस तरह से शरीर को हल्का तथा विश्राम एवं जोड़ों को ढीला करने में बहुत  बड़ी भूमिका निभाता है। यह योगाभ्यास आपको चुस्त दुरुस्त ही नहीं करता बल्कि आपके शरीर को सुडौल एवं खूबसूरती प्रदान करता है। शरीर में जहाँ तहाँ जो अतरिक्त चर्बी जमी हुई है उसको पिघलता है और आपके पर्सनालिटी में नई निखार ले कर आता है।
                            दर्शन शास्त्र के प्रोफेसर डॉक्टर सुनील वर्मा ने योग को दर्शन व अध्यात्म से जोड़ते हुए कहा संस्कृति में ‘कार्य के अनुशासन’ के रूप में भी जाना जाता है। यह योग के चार महत्वपूर्ण भागों में से एक है। यह निस्वार्थ गतिविधियों और कर्तव्यों के साथ संलग्न हुए बिना तथा फ़ल की चिंता किए बिना कोई काम करना सिखाता है। यह मुख्य पाठ है जो कर्म योगी को सिखाया जाता है। यह उन लोगों के लिए है जो आध्यात्मिक पथ की खोज करते हैं और परमेश्वर के साथ मिलना चाहते हैं। इसका अपने नियमित जीवन में ईमानदार तरीके से नतीजे की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य का संचालन करके भी अभ्यास किया जा सकता है। यह आध्यात्मिक विकास का मार्ग है। असल में कर्म जो हम करते हैं वह क्रिया है और उसका नतीज़ा इसकी प्रतिक्रिया है। व्यक्ति का जीवन अपने कर्म चक्र द्वारा शासित होता है। अगर उस व्यक्ति के अच्छे विचार, अच्छे कार्य और अच्छी सोच है तो वह सुखी जीवन जिएगा वहीँ वह व्यक्ति अगर बुरे विचार, बुरे काम और बुरी सोच रखता है तो वह दुखी और कठिन जीवन जिएगा आज की दुनिया में ऐसे निस्वार्थ जीवन जीना बहुत मुश्किल है क्योंकि मानव कर्म करने से पहले फ़ल की चिंता करने लगता है। यही कारण हैं कि हम उच्च तनाव, मानसिक बीमारी और अवसाद जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कर्म योग सभी भौतिकवादी रास्तों से छुटकारा पाता है और एक खुश और सफल जीवन का नेतृत्व करता है
                  असिस्टेंट प्रोफेसर जुगेश कुमार ने कहा लोगों को आम तौर पर लगता है कि योग व्यायाम का एक रूप है जिसमें शरीर के हिस्सों को हिलान-डुलाना शामिल है लेकिन योग व्यायाम से बढ़कर है। योग मानसिक, आध्यात्मिक और शारीरिक पथ के माध्यम से जीवन जीने की कला है। यह स्थिरता प्राप्त करने और आंतरिक आत्म की चेतना में ध्यान लगाने में सहायता करता है। मन, भावनाओं और शारीरिक आवश्यकताओं के बारे में ज्यादा ना सोचने और दिन-प्रतिदिन जीवन की चुनौतियों का सामना कैसे करें यह भी सीखने में मदद करता है। योग शरीर, मन और ऊर्जा के स्तर पर काम करता है। योग का नियमित अभ्यास शरीर में सकारात्मक बदलाव लाते हैं जिनमें मजबूत मांसपेशियां, लचीलापन, धैर्य और अच्छा स्वास्थ्य शामिल है इस मौके पर विभागाध्यक्ष ममता चतुर्वेदी प्रोफेसर रेखा सक्सेना डॉ गीता श्रीवास्तव डॉ रंजीत सिंह डॉ तरुण कुमार डॉक्टर रचना छात्राध्यापक अभिषेक श्रीवास्तव नगमा खान विवेक पटेल शेफाली वर्मा शिवांगी राठौर सुरेंद्र कुमार लक्ष्मी वर्मा, नीरज मिश्रा,  अवनीश पटेल, विपिन पटेल, मधुर पटेल, एहतेशाम अंसारी, शिव प्रकाश, आनंद, आशुतोष, राघवेंद्र, अंकुर,नरेंद्र,  शेफाली, नगमा खान, प्रियंका, रचना, दीपिका, बुशरा, शबनम, साधना, प्रीती, शिवनगिनी, प्रिया, नेहा, रीता, अंजलि, आदि लोग उपस्थित रहे।

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