मॉ स्रष्टि की अनुपम धरोहर सदा करो सम्मान : देवेन्द्र कश्यप

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सिधौली ( सीतापुर ) । जन्मदात्री मॉ के बराबर कोई नहीं है । मॉ ही स्रष्टि की अनुपम धरोहर है । मॉ भगवानों में शिरोमणि है इसलिए जन्मदात्री मॉ को कभी नाराज़ नहीं करना चाहिए वर्ना विश्व की परम सत्ता नाराज हो जायेगी फिर स्रष्टि पर संकट छा जायेगा ।

ये बातें मॉ दिवस के पावन मौके पर ” जन्मदायिनी मॉ अभिनन्दन कार्यक्रम ” में मॉ का सम्मान करते हुए सामाजिक चिंतक व कवि देवेन्द्र कश्यप ने तहसील क्षेत्र के अल्लीपुर गॉव में कही । उन्होंने ‘ मॉ ‘ शीर्षक से स्वरचित एक कविता प्रस्तुत करते हुए कहा , मॉ दुनिया का सार है , जो स्रष्टि का आधार है मॉ दयावान ‘निडर’ है मॉ ही अनाथ की शरण है । मॉ मन की मुदित भावना है , औ सफलता की साधना है ,वह संवेदना की शान है , अमर वेदनाओं की आन है । सहिष्णुता की प्रतिमूर्ति है , जो फैलाती यशकीर्ति है । मॉ ही साक्षात् भगवान है , कालजयी और महान है । मॉ ताल सरिता समुन्दर है मॉ पर्वत पठार गुल सुन्दर है मॉ ही मन्दिर और मस्जिद है , मॉ ही काबा और काशी है । मॉ ही बुद्ध विहार है , सारे धर्मों का आधार है । मॉ तो जीवन का आगाज है जिन्दग़ी के मुअम्में का राज है । मॉ तो स्याही और तेज कलम है , तड़ाग मध्य खिला कमल है । मॉ बच्चों की बुनियाद है जो पूर्ण करती हर फरियाद है । जहां में कुछ भी नहीं है ,जो मॉ में समाया नहीं है । इसलिए करें सम्मान नहीं जो मॉ का वह अशिष्ट है , स्वार्थ से लिपटा हुआ वह नर अनिष्ट है । सामाजिक कार्यकर्ता राजेश कश्यप ने कहा कि मॉ ही चेतना की सबसे बड़ी स्रोत होती है जो पूरे जग को चेतनापरक बनाती है । दुर्भाग्य तो तब होता है जब बचपन में सब इसके लिए लड़ते है कि मॉ मेरी है मॉ मेरी है वही जब बड़े हो जाते है तो कहते हैं मॉ तेरी मॉ तेरी है । मॉ खुद कष्टों में रहकर अपने सन्तान की भलाई के लिए जी जान लगा देती है इसलिए हरेक सन्तान को चाहिए कि वह हर तरीके से मॉ के लिए संघर्ष करें तभी उसका जीवन सफल होगा । जिस परिवार में मॉ खुश रहती है वह परिवार लगातार उन्नति करता है इसके विपरीत जिस परिवार में मॉ दु:खी होती है वह परिवार भी दु:ख में रहता है इसलिए मॉ को कभी दु खी नही करना चाहिए । कार्यक्रम में अपनी जन्मदायिनी मॉ की वन्दना करते हुए मिष्टान्न खिलाया और जीवन में सफल होने का आशीर्वाद लिया ।

इस मौके पर सचिन धुरिया , डीके कश्यप आदि उपस्थित रहे ।

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