बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही बरती तो होगी कड़ी कार्यवाही: डॉ० अशोक कुमार

0

फोटो परिचय- बैठक में जानकारी देते हुए डॉक्टर अशोक कुमार एवं डॉक्टर विशाल पाठक।

बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही बरती तो होगी कड़ी कार्यवाही: डॉ० अशोक कुमार

* सीएचसी मड़ावरा में हुआ बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में सावधानी संबंधित बैठक का आयोजन
* प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लेने की दी गई सलाह
* बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में लापरवाही बरतने पर होगी कार्यवाही
ललितपुर।
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मड़ावरा में चिकित्सा अधीक्षक डॉ० अशोक कुमार एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ० विशाल पाठक की अध्यक्षता में जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन यानी कि बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण संबंधित बैठक का आयोजन हुआ।
बैठक में चिकित्सा अधीक्षक डॉ० अशोक कुमार ने कहा कि जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन यानी कि बायो-मेडिकल वेस्ट के निस्तारण में
आदि लापरवाही बरती तो अब खैर नहीं है, सख्त कार्यवाही होगी। क्लीनिक संचालक चिकित्सक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से एनओसी लें। बैठक में स्थानीय/क्षेत्रीय प्राइवेट चिकित्सकों उपस्थित रहे। बैठक में चिकित्सा अधीक्षक डॉ० अशोक कुमार ने बताया कि जो भी चिकित्सक नियमों का अनुपालन नहीं करँगे उनपर कार्यवाही होगी। कहा मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय ललितपुर में 15 अप्रैल को अपरान्ह 3 बजे से सभी पंजीकृत/गैर पंजीकृत चिकित्सकों साथ मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अध्यक्षता में एक आवश्यक बैठक होगी, जिसमे संबंधितों का उपस्थित रहने अनिवार्य है।

बैठक में चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर विशाल पाठक ने कहा कि अस्पतालों से निकलने वाले जैव चिकित्सा अपशिष्ट का सही से तरीके से निस्तारण करना है, सही तरीके से निस्तारण न होने पर नुकसान है। उन्होंने कहा कि बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स, 2016 और बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट (अमेंडमेंट) रुल्स, 2018 के अनुसार बायो मेडिकल वेस्ट को उनके विविधता के हिसाब से चार भागों में बांटकर उसका निस्तारण किया जाना है। इसके लिए चार तरह के कूड़ेदानों का प्रयोग करना हैं लाल, पीला, नीला और सफ़ेद। बताया कि सौ प्रतिशत में मात्र 20 प्रतिशत ही जैव चिकित्सा अपशिष्ट होगा और उसमें भी 15 प्रतिशत ही संक्रामण पैदा करने वाला होगा। यदि कूड़े को उसकी विविधता के अनुसार अलग नहीं करेंगे तो वो 15 प्रतिशत संक्रमित अपशिष्ट बाकी साधारण अपशिष्ट में मिलकर उसको भी संक्रमित कर देगा, फिर उसका निस्तारण करना थोड़ा मुश्किल होगा। ऐसे में अपशिष्ट के पृथक्कीकरण का इस संबंध में सही जानकारी जरूरी होना जरूरी है प्राइवेट अस्पतालों में जैव चिकित्सा अपशिष्ट का पृथक्कीकरण सही से नहीं हो रहा है। चिकित्सक एवं बाकी स्टाफ़ को लगता हैं कि यह काम सफाई कर्मचारियों का है लेकिन सफाई कर्मचारियों को इस बात की समझ ही नहीं होती कि कौन सा कूड़ा कहा फेंकना है।
जैव चिकित्सा अपशिष्ट के संबंध में बताया कि ध्यान दे कि जैव चिकित्सा अपशिष्ट सही कूड़ेदान में डाले जाए। लेकिन बहुत बार ऐसा होता है कि कहीं किसी सफाई कर्मचारी को सफाई के दौरान कुछ मिला तो वो सीधे उसे जनरल कचरे में डाल देते हैं। बहुत बार उनको बताया भी गया लेकिन वो अलगाव नहीं कर पाते कि किसमें क्या डालना है? इसके लिए उनकी अलग से जिम्मेदारी दी जाये।
कहा कि यदि किसी भी प्राइवेट अथवा सरकारी अस्पताल ,क्लीनिक पैथोलॉजी द्वारा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एन ओ सी नहीं ली जाती है तो उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।

बैठक में चिकित्सा अधीक्षक
डॉ० अशोक कुमार, चिकित्सा अधिकारी डॉ० विशाल पाठक, डॉ० कुलदीप राजपूत, बीसी जैन, डॉ० राकेश जैन, डॉ० नीरज जैन,
डॉ० बीरेंद्र जैन, डॉ० बलराम निरंजन, डॉ० मनमोहन सोनी,
डॉ० शिखरचंद जैन, डॉ० जुगल किशोर सोनी, डॉ० अवधेश प्रताप निरंजन, डॉ० हरिओम शर्मा, डॉ० शिवकरन सिंह तोमर, डॉ० एपी सोनी नाराहट, डॉ० अभिषेक जैन,
डॉ० नवदीप रावत, संचालक गिरी पैथोलॉजी, नीतू पैथोलॉजी, पटेल पैथोलॉजी, श्रीराम पैथोलॉजी आदि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट: मानसिंह, ललितपुर।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

7 + 1 =