बच्चों के साथ शारीरिक शोषण के मामलों में 82 प्रतिशत की वृद्धि हुई-सविता

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3 सितम्बर 2018
रोहतक÷【संजय पांचाल】

रोहतक महिलाओं के विरूद्ध बढ़ती हिंसा, भूख, बेरोजगारी और गरीबी के खिलाफ कल 4 सितंबर को दिल्ली में महिलाओं की विशाल रैली संसद मार्ग पर होगी, जिसमें हरियाणा भर से हजारों महिलाएं हिस्सा लेंगी। रैली में हिंसा पीड़ित परिवार भी हिस्सा लेंगे।

जनवादी महिला समिति की राज्य महासचिव सविता व अध्यक्ष शकुन्तला जाखड़ ने कहा कि एक तरफ भाजपा सरकार महिला सशक्तिकरण व बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ पर अपनी पीठ ठोक रही है, दूसरी तरफ हर तरफ मानवता को शर्मसार करने वाली अनगिनत जघन्य घटनाएं सामने आ रही हैं।

उन्होंने बताया कि एक रिपोर्ट के अनुसार हमारा देश भारत दुनिया में महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश है। आज हर 15 मिनट में एक बच्चा लैंगिक हमले का शिकार हो रहा है। पिछले सालों में बच्चों के साथ शारीरिक शोषण के मामलों में 82 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। घरेलू हिंसा के मामले व हिंसा की विकरालता भी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। बढ़ती अश्लीलता व नशाखोरी ने महिलाओं पर हिसां को बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि आए दिन युवा लड़के-लड़कियों को इज्जत के नाम पर मारा जा रहा है। जाति व धर्म के नाम पर लोगों में जहर फैलाया जा रहा है। मोबलिंचिग की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे संकट के समय में हिंसा के खिलाफ एकजूट होना जरूरी है। हिंसा की मार झेलने के साथ-साथ महिलाएं गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण और महंगाई की मार भी झेल रही हैं।

सविता ने कहा कि कई सालों से गरीबी रेखा के राशन कार्ड नहीं बने हैं। राशन वितरण व्यवस्था ठप्प पड़ी है, दो तीन चीजें डिपो पर आती हैं, अब उन्हें भी लेना मुश्किल हो रहा है क्योंकि कहीं पर अंगुलियों के निशान नहीं मिलते तो कभी इंटरनेट सुविधा सुस्त पड़ जाती है। लोग भुखमरी के कगार पर पहुंच रहे हैं। विश्व भुख सुचकांक के मुताबिक भारत 119 देशों में से 100 स्थान पर है। पिछले दिनों दिल्ली में 3 बच्चियों ने भूख से दम तोड़ दिया। झारखण्ड़ में एक बच्ची सन्तोषी भात-भात कहते हुए मर गई क्योंकि अंगुठा ना मिलने की वजह से उन्हें कई दिनों से राशन नहीं मिला था।

उनका कहना था कि रोजगार के नाम पर भी महिलाओं के साथ धोखा किया जा रहा है। 2 करोड़ लोगों को हर साल नौकरी का वादा करने वाली मोदी सरकार ने सिर्फ नोटबंदी से ही 93 लाख लोगों का रोजगार छीन लिया। पढ़ी-लिखी महिलाओं के लिए सरकार की कोई रोजगार नीति नहीं है। पक्का रोजगार खत्म किया जा रहा है और ज्यादातर नौकरियां ठेका व अनुबंध आधार पर हैं, उनमें भी रिश्वत, सिफारिश व भ्रष्टाचार का बोलबाला है।

जनवादी महिला समिति की राज्य महासचिव ने कहा कि सक्षम के नाम पर युवाओं का भारी शोषण हो रहा है। मनरेगा के तहत 100 दिन का पूरा रोजगार देना तो दूर, किए हुए काम की मजदूरी भी नहीं मिल रही है। औरतें पीस रेट पर, घरों में झाड़ू-पौंछा करने, फैक्ट्रियों में कम मजदूरी पर काम करने को मजबूर हैं। सरकारी परियोजनाओं में खुद सरकार ही परियोजना कर्मियों का भारी शोषण कर रही है।

उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी में खाना बनाने का काम करने वाली मदर ग्रुप की महिलाओं को महीने में केवल ढाई सौ रूपए मिलते हैं, ये 250 रूपए भी मिले हुए साल-साल हो जाता हैं। अब सरकार उनसे यह काम भी छीन लेना चाहती है। ऐसे में सम्मान के साथ जीना आज हर महिला के लिए चुनौती बन गया है।

उन्होंने कहा कि बहुमत होने के बावजूद भी भाजपा द्वारा महिलाओं के लिए संसद व विधान सभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण बिल को पारित नहीं करवाया जा रहा है। इस सब के खिलाफ पूरे भारत से महिलाएं इकट्ठे होकर आन्दोलन करेंगी।

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