पाल सेवा संघ निःस्वार्थ भाव से कर रहा है सेवा

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पाल सेवा संघ नि:स्वार्थ भाव से कर रहा है सेवा

मनोज पाल / कौशलेश कुमार
वरिष्ठ पत्रकार

एक पुरानी कहावत है, ‘नेकी कर दरिया में डाल।’ इसका अर्थ है कि साथी, सहयोगी व समाज के साथ अच्छा व सुखद काम करने के बाद उसे भूल जाना चाहिए। आप सवाल कर सकते हैं कि क्यों भई, क्यों भूल जाना चाहिए? इसका जवाब तलाशने के लिए कहीं दूर नहीं जाना पड़ेगा। खुद अपने को व आसपास के लोगों को देखें और पूछने का प्रयास करें कि क्या हम किसी मुसीबत या प्राकृतिक आपदा या फिर सड़क दुर्घटना में घायल पड़े व्यक्ति की मदद करने के लिए आगे बढ़ते हैं?
इस प्रतिप्रश्न का जवाब कुछ लोग तपाक से दे सकते हैं, ‘हां, हम मदद करेंगे। जरूरतमंद की सहायता करनी चाहिए।’ अनेक लोग मिमयाती हुई आवाज में कहेंगे, ‘करते हैं भाई, हम भी मदद करते हैं।’ इन दोनों ही जवाबों में अंतर आप समझ सकते हैं। सबसे बड़ी बात तो यह भी खुलती है कि कोई भी स्वयं को गलत नहीं मानता। कसूरवार तो हमेशा ‘दूसरा’ ही होता है।
सच्चाई यह है कि बहुत कम लोग होते हैं समाज में जो बगैर किसी स्वार्थ के किसी की मदद करते हैं। उसमें से एक पाल सेवा संघ है जो बिना स्वार्थ के समाज हित में कार्य कर रहा है। आए दिन समाज के दुर्घटनाग्रस्त घायल , बीमार, निर्धन ,दैवी आपदा से पीड़ित तथा जरूरतमंद गरीब व्यक्तियों को संघ एक तय रकम देकर एक बहुत बड़ी मदद का कार्य करता है। पाल समाज की सेवा का यह महान कार्य पिछले एक दशक से कर रहा है पाल सेवा संघ। सेवा की यह व्यवस्था संघ के पदाधिकारियों की कड़ी मेहनत व उनके खुद के आर्थिक सहयोग तथा पाल सेवा क्रेडिट सोसायटी के द्वारा होने वाली चैरिटी की रकम से चलाई जाती है।संघ की नि:स्वार्थ सेवा से समाज में गहरी आस्था बढ़ती जा रही है,जिससे संघ के पास जरूरतमंदों की लंबी सूची पहुंचने लगी है। संघ के पास फंड की कमी होते हुए भी सभी की मदद करने का प्रयास कर रहा है संघ। संघ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मदद करने पर कोई भी पदाधिकारी इसका श्रेय खुद नहीं लेता बल्कि पाल सेवा संघ को देता है।

बस नाम ही काफी है

संघ का विस्तार अब मुंबई से बाहर नासिक,सूरत, दिल्ली, गाजियाबाद,मेरठ , अंबेडकर नगर, प्रतापगढ़, इलाहाबाद तथा जौनपुर व गोरखपुर तक पहुंच चुका है। संघ की सेवाओं से प्रभावित होकर समाज के सैकड़ों-हजारों लोग संघ से जुड़ रहे हैं,क्योंकि यहां व्यक्ति महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि संघ का नाम महत्वपूर्ण है। संघ का आदर्श वाक्य है “कार्य ही पूजा है।” कार्य के बदले मंच व माला की चाह रखने की इच्छा रखने वालों को यहां नहीं मिलती जगह। समाज का कार्य करने के बदले नहीं दिया जाता किसी भी प्रकार का भत्ता अथवा चाय नाश्ता। यह संकल्प चला आ रहा है तेईस वर्षों से।

सेवा की व्यवस्था को बड़ा बनाने के प्रयास में लगा हुआ है संघ

संघ के पदाधिकारी यह मानते हैं कि उनके दस हजार रुपए की मदद से उनके यहां मदद की गुहार लगाने वाले भाइयों की जरूरतें पूरी नहीं हो पाती। इसीलिए संघ इस व्यवस्था को बड़ा करने का निरंतर प्रयास कर रहा है। मुंबई में भव्य, विशाल व बहुउद्देशीय पाल भवन के निर्माण से समाज की शान बढ़ेगी तथा सेवा के मिशन को पूरा सहयोग मिलेगा। इसीलिए दिन रात समाज के लोगों से धन संग्रह के लिए करजोर मेहनत करता रहा है संघ।
समाज से है बड़ी आशा
संघ के तमाम पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को समाज से बड़ी आशा है कि एक न एक दिन यह सपना जरूर होगा पूरा। लोग आगे आएंगे और दिल खोलकर भवन निर्माण में योगदान करेंगे।संघ निर्धन तथा मेधावी छात्रों को स्कालरशिप भी दे पाएगा तब । यही सोच को आगे करके कार्यक्रम चला रहा है संघ परिवार। इसलिए सभी स्वजातीय भाइयों एवं बहनों को संगठित होकर पाल सेवा संघ की सेवा यात्रा में जुड़ जाना चाहिए।

रिपोर्ट मनोज कुमार /कौशलेश कुमार

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