देश के लिए मिसाल, ईमानदार और जिम्मेदार राजनेता को शत्-शत् नमन

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3 अक्टूबर 2018
हरियाणा÷【संजय पांचाल】

देश के लाल.. शास्त्री बहादुर लाल

देश के सच्चे लाल पूर्व प्रधानमंत्री स्व लाल बहादुर शास्त्री जी को उनके जन्मोत्सव पर शत शत नमन।

शास्त्री जी भारतीय राजनीति के ऐसे हस्ताक्षर, जो एक मिसाल हैं ईमानदार और जिम्मेवार राजनेता की।

सही में अगर भारतीय जनमानस दिल के अंतःकरण से किसी राजनेता को चाहता है तो वो शास्त्री जी ही हैं।

एक गरीब परिवार में जन्म लेकर साधनविहीन होकर भी शीर्ष पर कैसे जाया जाता है, शास्त्री जी उसके सटीक उदाहरण हैं।

जय जवान जय किसान की सोच को मूर्तरूप उन्होंने ही दिया था। जब देश मे अनाज की कमी थी तो उनके एक आह्वान पर लोगों ने सप्ताह में एक समय भोजन का त्याग किया ताकि जो भूखे रहते हैं उनके लिए भी कुछ बचे और देश को विदेशों से ज्यादा अनाज ना मंगवाना पड़े। हरित क्रांति का सूत्रपात उन्होंने ही किया था।

आज की राजनीति में सिर्फ काम होने का श्रेय लेते हैं काम ना हो या गलत हो जाये उनकी कोई अकॉउंटेबलिटी नही है। ये शास्त्री जी ही थे जिन्होंने मात्र एक रेल दुर्घटना होने पर उसकी जिम्मवारी लेते हुए त्यागपत्र दे दिया था। आज देश की अर्थव्यवस्था का सत्यानाश होने, कानून व्यवस्था का भट्ठा बैठने पर भी कोई जिम्मेवारी नहीं लेता।

ये देश का दुर्भाग्य ही था कि उनका आकस्मिक निधन हो गया। उनका यूं चला जाना भारतीय राजनीति में पारिवारिक राजसत्ता का कारण बना। अगर वो कुछ समय और जीवित रहते तो देश की राजनीति में पारिवारिक राजसत्ता को पनपने का मौका नहीं मिलता। उनके बाद ही इन्दिरा गांधी ने देश की बागडोर संभाली जो पारिवारिक राजसत्ता की नींव डाल गयी भारत में।

भारत का ये दुर्भाग्य ही रहा है कि वास्तव के जननेता का निधन एक पहेली ही बना रहा, वो चाहे नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी हों या लाल बहादुर शास्त्री जी हों। भारतीय मानस तो उनके निधन को सामान्य नहीं मानता अपितु एक साजिश मानता है। जिसकी ना तो जाँच हुई अच्छी तरह से और ना देशवासी सत्य जान सके।

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