दिलीप प्रजापति गरीबों को रात रात बांटते कपड़े।

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  • जानकीपुरम( लखनऊ )

जुनूँ है जहन में तो हौसले तलाश करो

मिसाले आबे रवां रास्ते तलाश करो

ये इज्तराब रगो में बहुत जरुरी है

उठो सफर के नये सिलसिले तलाश करो हां इन्हीं पंक्तियों को चरितार्थ कर रहे हैं जानकीपुरम लखनऊ इंजीनियरिंग कॉलेज के दिलीप प्रजापति जी हां आपको बताते चलें दिलीप प्रजापति और उनकी टीम अतुल प्रजापति कुमार गुप्ता शशांक वर्मा फुटपाथ पर लेटे हुए गरीब निर्धनों को अंग वस्त्र बांटने की कवायद शुरू की है दिलीप कुमार प्रजापति कहते हैं कड़ाके की ठंडक में निर्धन गरीब जो पुल के नीचे फुटपाथ पर लेटे रहते हैं उनको हम सब लोग कपड़े बांटने का काम करते हैं। जज्बा रखने वाले व्यक्ति समाज सेवा की क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर पाते हैं और अपने कार्यों से समाज की निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं

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