जेल में बंद किसान की संदिग्ध हालात में मौत, बैंक का कर्ज ना भरने के चलते गया था जेल

0

3 अक्टूबर 2018
हरियाणा÷【संजय पांचाल】

भिवानी में देर रात जेल में बंद एक किसान की संदिग्ध मौत हो गई। चैक बाऊंस के बाद जिला कोर्ट ने चैहङ कलां निवासी रणबीर नामक किसान को दो साल की सजा सुनाई थी। फिलहाल परिजनों ने शव लेने की बजाय अपनी मांगों को लेकर बहल में धरना शुरु कर दिया है।

बताया जाता है कि गांव चैहङ कला निवासी करीब 64 वर्षिय रणबीर ने कई साल पहले लोहारू लैंड मोर्गेज बैंक से कर्ज लिया था। एक बार करीब डेढ लाख रुपये ट्रेक्टर के लिए और एक बार फवारा सैट के लिए कर्ज लिया था। 1995 और उसके बाद 2006 में लिया गया ये कर्ज भरने में रणबीर असमर्थ रहा। वहीं कर्ज ना भरने पर बैंक ने ब्याज जोङ जोङ कर इसे दो साल पहले 9 लाख 83 हजार रुपये कर दिया।

बैंक के दबाव में रणबीर द्वारा दिया गया बलैंक चैक बैंक ने लगा दिया। चैक बाऊंस होने पर बैंक ने रणबीर पर लोहारू कोर्ट में केस दर्ज कर दिया। यहां रणबीर को दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई। इसके बाद रणबीर ने जिला कोर्ट में अपील की थी। यहां उसकी अपील खारीज हो गई और कोर्ट ने रणबीर को दोषी मानते हुए 20 सितंबर को दो साल के लिए जेल भेज दिया। देर रात जेल में उसे अचानक सिने में दर्ज के चलते चौधरी बंसीलाल नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

देर रात ही परिजनों को इस मामले की सूचना दी गई। परिजनों ने बिना कोई शिकायत, कार्यवाई व पोस्टमार्टम के सुबह बहल में धरना दे दिया। यहां परिजनों व किसान संगठनों ने मांग की कि मृतक किसान रणबीर का कर्ज माफ किया जाए, उसके परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए और सभी बैंकों से कर्ज लिए हुए किसानों के बलैंक चैक वापस दिए जाएं। परिजनों व किसान नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

वहीं सदर थाना प्रभारी एसआई देशराज दहिया ने बताया कि चैहङ कला गांव निवासी रणबीर की जेल में सिने में दर्द होने तथा उपचार के दौरान चौधरी बंसीलाल अस्पताल में मौत होने की सूचना मिली थी। उन्होने बताया कि इस मामले में सीजेएम द्वारा कार्यवाई की जानी है। थाना प्रभारी ने बताया कि पुलिस परिजनों द्वारा कोई शिकायत देने के बाद ही कोई कार्यवाई करेगी।

शुरुआती दौर में मामला हार्ट अटैक का लग रहा है, लेकिन मौत के असल कारणों का पता पोस्टमार्ट होने व रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा। अब बङा सवाल ये है कि हजारों करोङ रुपये के कर्ज लेकर चुना लगाकर विदेशों में मौज मार रहे हैं और यहां दिन-रात अपने खुन पशीने की मेहनत करने वाला अन्नदाता चंद लाख रुपये कर्ज लेकर अपना घर व खेतीबाङी चलाता है वो जेल जा रहे हैं और ये जेल का डर व शर्म उन्हे दुनिया छोङने पर मजबूर कर रही है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

50 − = 42