” चुनाव ” रचनाकार देवेंद्र कश्यप सामाजिक चिंतक ‘निडर’

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अवधी मा देवेन्द्र कश्यप ‘निडर’ जी की चर्चित रचना

          “चुनाव”

जब रस्ते अउ चउराहेन पर l

घर के अन्दर बाहेर चउतरन पर l

चौपालन की बइठकिन मा l

चकल्लस मिलइ खूब बतकहिन मा ll

तब तुम जानि जाव चुनाव आय गवा हइ ll

तब जानि जाव………..२

जब सइकिलिन से लइके मोटरसइकिलिन तक l

खटारा जीपन से लइके आराम वाली गाड़िन तक l

पो पो सों सों जगह जगह सुनाय पड़य l

औरु बीचन बीचन मा हैलीकप्टरवा भन्नाय पड़य ll

तब तुम जानि जाव……..२

जब नेता सबके चरनन मा गिरइ लागइ l

जनता के आशिर्वाद पावइ खातिन्ह तरसइ लागइ l

गॉवन की धूल औ गलियन कइहां छानइ लागइ l

चारिउ ओर नेता और नेतइन देखाय लागइ ll

तब तुम जानि जाव चुनाव……….२

जब सूमी रुपया पइसा जनता पर लुटावइ लागइ l

फिरी मा मुर्गा औ बकरा खुब खवावइ लागइ l

मतदातन के सुख दुख मा बड़क्के भइया शामिल होय लागइ l

कोई बुलावे पर तो कोइ कोइ अइसइ ठाड़ होय लागइ ll

तब तुम जानि जाउ………..२

जब बाजा ढ़ोढ़े मंगरे खातिन्ह बाजइ लागइ l

पर्चा औरु खर्चा गरीबवन कइहां मिलइ लागइ l

मीटिंग हियां हइ हुवां हइ का शोर सुना़य लागइ l

जहिमा पहुँचावइ खातिन्ह लोग इन्तजाम करइ लागइ ll

तब तुम जानि जाव………..२

जउनी मेहरुआ कबहूँ घर से न निकरती होय l

पास पड़ोसियन का अबही तक हाल चाल न लेहिन होय l

वहे जब घर घर मारी मारी फिरइ लागइ l

खैरसल्ला सबकी अइसे पूछइ जइसे वहि उनकी भउजी लागइ ll

तब तुम जानि जाव……………..२

जब नाली खड़न्जा सुधरावइ की बात दद्दू करइ लागइ l

टटिया फरिका सेने कॉलोनी क्यार ख्वाब देखावइ लागइ l

गरीबवन कइहां पेन्शन दिलवावइ का वादा करइ लागइ l

अनाथन केरे जगह जगह नाथ देखाय लागइ ll

तब तुम जानि जाव…………….२

जब सड़कन के दिन बहुरइ लागइ l

सत्तारी लोगन कइहां रोजगार मिलइ लागइ l

बिजुली बड़े धड़ल्ले से आवइ लागइ ll

स्कूल हस्पताल फैक्टियरन के बनुवावकि बात चलइ लागइ ll

तब तुम जानि जाव………

जब गरीबवन केरे दुख मा नेता जी दुखी होय लागइ l

मगरमच्छ जइसन बनिकै मगरमच्छी ऑसू टपकावइ लागइ l

गिद्ध जइसी नजर सेने तुमहुक दूर के ख्वाब देखावइ लागइ l

कउवा बनि चतुराई के सबक तुमहुक पढ़ावइ लागइ ll

तब तुम जानि जाव………………

जब ठौर टक्करिन केरे नघींचे बड़े बड़े लोग पहुँचइ लागइ l

औरु बिछड़ेन कइहां लोग मनावइ लागइ l

जिनका मजाक उइ कबहूँ खुब करिन l

अब जब उन्हेंन के ग्वाड़न पर वहे ‘निडर’ खोपड़ी धरइ लागइ ll

तब तुम जानि जाव …………२

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