गांवों में पीने का दोगुना पानी उपलब्ध करवाने की तैयारी, सरकार बना रही है योजना

0

8 जुलाई 2018
संजय पांचाल रोहतक(हरियाणा)

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की एक व्यापक कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में प्रति व्यक्ति पेयजल उपलब्धता को 70 लीटर प्रतिदिन की बजाए 130 लीटर प्रतिदिन तक किया जाएगा।

मुख्यमंत्री आज हिसार के गांव मय्यड़ में सरकार द्वारा खरीफ फसलों के दाम बढ़ाए जाने पर आयोजित धन्यवाद समारोह के दौरान जनसभा को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी सीमित है और लगातार बढ़ती जनसंख्या के कारण इसका संकट बढ़ता जा रहा है। प्रदेश सरकार बड़े स्तर पर जल संरक्षण के विभिन्न पहलुओं वाली योजना पर कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि 1976 में बनी 2600 क्यूसिक क्षमता की इस नहर में कभी भी 2600 क्यूसिक पानी नहीं छोड़ा गया क्योंकि इतना पानी छोडऩे पर इसके टूटने का खतरा रहता था। लेकिन अब सरकार ने उचित प्रबंधन और सफाई के माध्यम से जवाहर लाल नेहरू नहर की भंडारण क्षमता को बढ़ाकर कल ही इसमें 3000 क्यूसिक पानी छोड़ा है और आगे इसे बढ़ाकर 4000 क्यूसिक करने का लक्ष्य है। इससे बरसात का पानी अधिक मात्रा में सहेजा जा सकेगा। इससे भूमिगत जलस्तर में वृद्धि होगी और प्रदेश के खेतों को ज्यादा मात्रा में पानी मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह काम पहले की सरकारों द्वारा भी किया जा सकता था लेकिन उन्होंने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 6500 गांवों में 14000 तालाब हैं। राज्य में तीन प्रकार के तालाब हैं, पहली श्रेणी के तालाब ओवरफ्लो हैं जिनका पानी गंदा हो चुका है और ग्रामीण इनका पानी निकलवाकर ड्रेनों में डलवाने की मांग करते हैं, दूसरी श्रेणी के तालाब सूखे पड़े हैं और तीसरी श्रेणी के तालाब न तो ओवरफ्लो हैं और न ही सूखे पड़े हैं लेकिन इनका पानी भी गंदा हो चुका है। इन तालाबों की दशा सुधारने के लिए ओवरफ्लो तालाबों का इस्तेमाल खेतों में सिंचाई के लिए किया जाएगा। इससे ये तालाब स्वच्छ रहेंगे और पशुओं के पीने व नहलाने के लिए पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसी प्रकार, सूखे तालाबों का उचित प्रबंधन करते हुए इनमें भी पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी भरवाया जाएगा। इस कार्य के लिए प्रदेश सरकार ने तालाब प्राधिकरण का गठन किया है।

उन्होंने कहा कि अभी प्रदेश में खुली सिंचाई की जाती है जिसमें पानी का ज्यादा उपयोग होता है। अब सरकार द्वारा नई तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर सूक्ष्म सिंचाई व अन्य जल संरक्षण उपायों को लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मैंने पिछले दिनों इजराइल दौरे के अवसर पर वहां कम पानी में अधिक खेती करने की नई तकनीकें देखी जिनका हरियाणा में भी इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 1300 में से 300 टेलें सूखी थीं जिनमें से लोहारू, सिवानी, नारनौल, महेंद्रगढ़ व नूंह की 293 टेलों तक पानी पहुंचाया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि धान की फसल में पानी का ज्यादा उपयोग होता है। प्रदेश में इसके विकल्प के रूप में फसल विविधिकरण को प्रोत्साहन दिया जाएगा ताकि धान की फसल न बोने पर किसानों को कोई नुकसान न हो। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे कम पानी वाली फसलें बोने को प्राथमिकता दें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

+ 89 = 97