खेलकूद से विद्यार्थियों में साहस अनुशासन एकाग्रता आती है : प्राचार्य डॉक्टर प्रनिता सिंह

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  • खेलकूद से विद्यार्थियों में साहस अनुशासन एकाग्रता आती है : प्राचार्य डॉक्टर प्रनिता सिंह

    संवाददाता चंद्रशेखर प्रजापति
    सीतापुर / उत्तर प्रदेश । शिक्षाथियों को खेल कूद व सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेना चाहिए जिससे उनका चहुँमुखी विकास हो सके यह बात आचार्य नरेंद्र देव टीचर ट्रेनिंग कॉलेज सीतापुर में आयोजित वार्षिक खेलकूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधन करते हुए प्राचार्या डाक्टर प्रनिता सिंह ने कहीं आगे उन्होंने कहा खेल लगभग सभी बच्चों द्वारा पसंद किए जाते हैं, चाहे वे लड़की हो या लड़का। आमतौर पर, लोगों द्वारा खेलों के लाभ और महत्व के विषय में तर्क दिए जाते हैं। और हाँ, खेल का हरेक प्रकार शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक और बौद्धिक स्वास्थ्य के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। यह व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है। नियमित खेल खेलना मानसिक कौशल को विकसित करने में मदद करता है। यह एक व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक कौशल में भी सुधार करता है। यह प्रेरणा, साहस, अनुशासन और एकाग्रता को लाता है। मीडिया प्रभारी डॉक्टर इमरान ने कहा स्वस्थ तन स्वस्थ मन का विकास होता है और स्वस्थ मन से व्यक्ति के दिमाग स्वस्थ शिक्षा का आगाज होता है और व्यक्ति को गुणवान बना कर तरक्की की आसान बनाती है।
    डॉक्टर नितिन पांडे ने कहा तालीम वह रोशनी है जो व्यक्ति को हर क्षेत्र में परिपक्व बनाती है। हमारे कालेज में शिक्षा के साथ साथ अनेक सहगामी क्रियाओं का आयोजन होता रहता है जो बहुत ही काबिले तारीफ है। सहायक प्रोफेसर डॉक्टर दीपा अवस्थी ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को समदर्शी बनाती है और यह ब्यक्ति के विकास का मूलमन्त्र है।खेल प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का एक हिस्सा है और यह उतना ही जरूरी है जितना शरीर के लिए भोजन। जिस प्रकार शरीर को नई ऊर्जा देने के लिए भोजन की जरूरत पड़ती है उतना ही ऊर्जा और ताजगी खेल शरीर को देते हैं। विद्यार्थी जीवन में मानसिक बोझ और शारीरिक थकान को हलका करने का एक साधन है तो वह है खेल और यह खेल हमारे शारीरिक क्रिया कलापों से जुड़े हो यह बेहद जरूरी है। क्यों कि आज यदि मनोरंजन की बात आती है तो केवल मोबाइल और कम्प्यूटर को मुख्य साधन माना जाता है जिनसे एक अकेला व्यक्ति भी अपना मनोरंजन कर सकता है ।
    डॉक्टर सुनील कुमार ने कहा प्रत्येक विद्यार्थी अपनी पढ़ाई को लेकर एक मानसिक तनाव से गुजर रहा है इतना ही नहीं वह इस तनाव की वजह से स्वयं को ज्यादा समय तक पढ़ाई से जोड़ भी नहीं पाता है और एक किताबी कीड़ा बना रहता है, जिससे विद्यार्थी एक अलग सा ऊबाउपन महसूस करता है जिससे कि एक ही चीज़ को बार बार पढ़ लेने के बाद भी वह दिमाग में नहीं बैठ पाती है। तो इसका साफ कारण हमारी मानसिक थकान ही है। और उस थकान और तनाव को दूर करने के लिए हमें बहुत जरूरी है खेलों से जुड़े रहना। स्वयं के लिए समय का कुछ हिस्सा निकाला जाये जिससे हम अपना मनोरंजन कर सकें और मनोरंजन का मुख्य साधन शारीरिक गतिविधियों से संबंधित खेल ही हो। इस मौके पर हिंदू कन्या महाविद्यालय बीएड संकाय की विभागाध्यक्ष डॉक्टर क्षिप्रा, डॉक्टर सपना डाइट खैराबाद, डॉ प्रनिता सिंह( प्राचार्य) आचार्य नरेंद्र टीचर्स ट्रेनिंग पीजी कॉलेज सीतापुर असिस्टेंट प्रोफेसर सुनील कुमार नितिन पांडे, मोहम्मद इमरान , डॉक्टर दीपा अवस्थी, प्रवक्ता राज कीर्ति रस्तोगी, प्रवक्ता सुरभि अवस्थी ,छात्रा अध्यापक अमित कुमार प्रजापति, सुजीत कुमार ,नरेंद्र प्रताप दिक्षित, शिवम मिश्रा बृजेश संदीप कुमार, रवि शंकर, पटेल आलोक सिंह वंदना आकांक्षा श्रीवास्तव, राजमाला, अंकिता, अभय, गौरव, नेहा तिवारी, कामिनी दीक्षित ,प्रियंका सिंह ,रंजीत सिंह, प्रियंका सिंह, शालिनी वर्मा ,प्रतिभा वर्मा, शिखा शुक्ला ,रेनू ,साधना वर्मा, तनिष्का शुक्ला, धीरेंद्र कुमार राठौर, रमाकांत ,अमरेंद्र कुमार, मंगलमयी ,स्वाति ,सविता ,हिमांशी राजपूत ,दीपांकर आदि लोग उपस्थित रहे।

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