कृमि मुक्ति दिवस: कृमि मुक्ति हेतु बच्चों को खिलाई गई एल्बेंडाजोल की गोली

0
Online Hindi news paper khabren apne nagar ki
Online Hindi Newspaper: खबरें अपने नगर की

फ़ोटो परिचय- कृमि मुक्ति दिवस पर बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोली खिलाते हुए डॉक्टर विशाल पाठक एवं तहसीलदार मड़ावरा सौरभ पाण्डेय।

कृमि मुक्ति दिवस: कृमि मुक्ति हेतु बच्चों को खिलाई गई एल्बेंडाजोल की गोली
* विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में खिलाई गई दवा
ललितपुर।
कृमि मुक्ति दिवस पर प्राथमिक विद्यालय एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय मड़ावरा टौरिया में कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम का आयोजन तहसीलदार मड़ावरा सौरभ पाण्डेय के मुख्य आतिथ्य एवं प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर विशाल पाठक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मड़ावरा की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम की शुरुआत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तहसीलदार मड़ावरा सौरभ पाण्डेय ने स्वयं एल्बेंडाजोल की गोली खाकर किया। इसके बाद उन्होंने प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोलियां खिलाई। कार्यक्रम में बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा के फायदों को बताते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों को कुपोषण से मुक्त दिलाने, रक्त की कमी की समस्या को दूर करने, बच्चों के पेट के कीड़ा मारने में अत्यंत लाभकारी है एल्बेंडाजोल की गोली।

प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मड़ावरा डॉक्टर विशाल पाठक ने कहा कि बच्चों को दवा खिलाते समय कुछ सावधानी भी बरतनी होगी, जैसे कि अगर किसी बच्चों की कोई गम्भीर बीमारी का इलाज चल रहा है और वह नियमित रूप से दवा का खा रहा है, कोई भी बच्चा बीमार है तो उसे यह दवा नहीं खिलाई जाएगी। दवा नुकसान नहीं करेगी लेकिन सावधानी के तहत ऐसे बच्चों को दवा नहीं दी जाएगी। एक से दो वर्ष तक के बच्चों को आधी गोली खिलाया जाना है तथा 2 वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को पूरी गोली खिलाया जाना है।
कहा कि जिन बच्चों के पेट में कीडों की अधिकता होगीं उनके द्वारा दवा का सेवन करने पर यह मामूली लक्षण सामने आएगें जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। जैसै दवा खाने के बाद जी मचलना, पेट में हल्का दर्द, उल्टी, दस्त और थकान महसूस होना, लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। पेट में कीड़ा होने के कारण यह प्रतिकूल प्रभाव दिखाई देगा। इस दौरान बच्चों को आराम की सलाह दे तथा उसे लेट जाने को कहे, 10 मिनट में समस्या स्वयं ही दूर हो जाएगी। 

उन्होंने कृमि संक्रमण के लक्षण बताते हुए कहा कि कृमि संक्रमण पनपने से बच्चे कुपोषित हो जाते है, बच्चों के शरीर में खून की कमी हो जाती है, बच्चे हमेशा थकान महसूस करते है, बच्चों का शारीरिक मानसिक विकास भी बाधित हो जाता है, बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता की भी कमी हो जाती है।
उन्होंने कृमि संक्रमण से बचाव के उपाय बताते हुए कहा कि बच्चें नाखून साफ और छोटे रखें, हमेश साफ और स्वच्छ पानी ही पीऐं, खाने को ढक कर रखें, साफ पानी में फल व सब्जियां धोएं, अपने हाथ साबुन से धोए विशेषकर खाने से पहले और शौच जाने के बाद, घरों के आसपास साफ-सफाई रखें, खुले में शौच न करे हमेशा शौचालय का प्रयोग करें। इसके साथ ही विभिन्न परिषदीय विद्यालयों, आंगनबाड़ी केन्द्रों में आंगनबाड़ी कार्यकत्री, सहायिकाओं द्वारा बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई गई।
कार्यक्रम में ए०बी०आर०सी० जयकुमार तिवारी, संतोष सिद्धिकी, स०अ० आरिफ़ अल्वी, मानसिंह, शिक्षामित्र पुरुषोत्तम विश्वकर्मा, इं०प्र०अ० साधना ताम्रकार, स०अ० पंकज कुमार आदि उपस्थित रहे।
रिपोर्ट- मानसिंह।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

− 2 = 5