उदयातिथि 3 सितम्बर को जन्माष्टमी मनाना विशेष पुण्यदायी

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30 अगस्त 2018
【संजय पांचाल】

जन्माष्टमी सेप्सल
2 सितम्बर को सुर्योदय के समय नहीं है अष्टमी

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की दो तिथियों को लेकर उत्पन्न हुए भ्रम को दूर करने के संबंध में विद्वानों द्वारा शास्त्रसंवत उद्बोधन व्यक्त किए जा रहे हैं। शास्त्र के अनुसार कोई भी पर्व उसी तिथि को मनाना श्रेयस्कर होता है जिस तिथि कर शुभारंभ सूर्योदय के दौरान हो। पंचांग के अनुसार जन्माष्टमी का शुभ समय 2 सितम्बर को रात 8.47 पर शुरु होकर 3 सितम्बर को शाम 7.20 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में 2 सितम्बर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि का शुभारंभ नहीं हो रहा है। ऐसे में 2 सितम्बर को व्रत रखना भी उतना फलदायी नहीं होगा जितना 3 सितम्बर को। पंचांग दिवाकर में उल्लेख किए गए धर्मसिंधु व हेमाद्री का व्याख्यान देते हुए कहा कि इदं दुर्वा पूजनं व्रत कन्याअर्केअगस्तोदये च वज्र्यम्, भाद्र शुक्लाअष्टायां अगस्तोदये भाविनी सति पूर्व कृष्णाष्टम्यामेव कुर्यात्।। इस वर्ष भाद्र शुक्लाष्टमी 17 सितम्बर को है, जिस दिन आश्विन मास आरंभ हो रहा है। अतएव शास्त्र निर्देशानुसार दूर्वाष्टमी का व्रत पूर्ववर्ती भाद्र कृष्ण पक्ष की रोहिणी व्याप्त अष्टमी तिथि 3 सितम्बर 2018 ई, सोमवार को करना शुभ, फलदायी और शास्त्रसम्मत है। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा एवं वृंदावन में भी जन्माष्टमी का पर्व 3 सितम्बर को ही मनाया जा रहा है। सनातन धर्म सभा से जुड़े सभी बड़े 56 मंदिरों में भी जनमाष्टमी 3 सितम्बर को मनाई जा रही है। श्री हरि विष्णु के आठवें अवतार के रुप में भगवान कृष्ण इसी अष्टमी को अवतरित हुए। अत: उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए अष्टमी के व्रत धारण कर भजन-कीर्तन करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।

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