आशा हुड्डा मेरी क्लास टीचर रही है, जब वक्त आएगा तो हुड्डा साहब के साथ आराम से बैठूंगा, कोई दिक्कत नहीं -प्रदीप कासनी

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2 जुलाई 2018
संजय पांचाल रोहतक(हरियाणा)

हरियाणा के इतिहास में कई अफसर खुद को राजनीति के खेल में आजमा चुके हैं। हाल ही में चर्चित अफसर रहे प्रदीप कासनी भी रिटायरमेंट लेने के बाद राजनीति में आए। दादरी जिले के कासनी गांव में जन्मे प्रदीप श्योराण एक तेज तर्रार और भ्रष्टाचार के मामले उजागर करने वाले अफसर के रूप में याद किए जाते हैं। यह दिलचस्प है कि जिस कांग्रेस पार्टी की सरकार के साथ उनका टकराव सबसे ज्यादा रहा, उन्होंने राजनीति करने के लिए उसी पार्टी को चुना।

राहुल गांधी और अशोक तंवर के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने वाले प्रदीप कासनी से आज बातचीत की।

 सवालः आप कई दिनों से कांग्रेसी हो चुके हैं, अब आपको कैसे लग रहा है आपका फैसला सही था कांग्रेस में शामिल होने का ?

जबावः बिल्कुल में कांग्रेसी हो चुका हूं, ये फैसला मेरा नहीं था, बल्कि सभी साथियों का है, जो मेरे साथ जुड़े हुए हैं, 15 दिन ही नहीं 1500 दिनों बाद भी पूछोगे तो भी मेरा यही फैसला रहेगा।

सवालः पार्टी तो एक साथ लेकर चल रही है, लेकिन हरियाणा वाली कांग्रेस में तो बहुत गुटबाजी है, इससे कैसे निपटेगी ?

जबावः देखिये पार्टी में गुटबाजी दिखती होती कम है और दिखती ज्यादा है। यह पार्टी के अंदर आंतरिक प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में बहुत सारे लोग होते हैं जो अपने अपने तरीके से काम करते हैं। आप देखिये जो पार्टी सत्ता में आने के करीब होती है उनमें गुटबाजी ज्यादा दिखती है। दूसरा बड़ी पार्टी है और इसमें सभी की अलग अलग सोच रहती है तो कामकाज के तरीके में अलग अलग हो सकता है, लेकिन जब जरुरत पड़ेगी तो सभी एक मंच पर एकजुट दिखाई देंगे।

सवालः आपकी हुड्डा साब के साथ थोड़ी खटास ज्यादा दिखाई देती है, वो भी आपके बारे में सवाल पूछते हैं तो रिजल्ट आने की बात कहते हैं, सीएम होते हुए भी आपकी खींचतान रही थी।

जबावः देखिये मेरा सरकारों में विचलन और जो आस-पास से चीजें आती है, उनको लेकर कड़वाहट थी, मेरा हुड्डा साब या अन्य किसी नेता के साथ ऐसी कोई बात नहीं है। मेरा मिसेज हुड्डा के साथ भी अच्छे संबंध रहे हैं, वो मेरी क्लास टीचर रही हैं। और जब पार्टी में कोई बात आएगी तो हम सब साथ में बैठेंगे और आगे भी साथ दिखते रहेंगे।

सवालः आप तबादलों के मास्टर रहे हैं, नौकरी के दौरान आपके 70 से ज्यादा तबादले हुए हैं, अब पार्टी में तो तबादलों को कोई प्लान नहीं है आपका ?

जबावः देखिये मैं मानता हूं मेरे काफी तबादले हुए हैं, लेकिन ये मेरे लिए अच्छा रहा है, भले ही मेरे और परिवार के लिए कुछ खराब भी रहा हो, लेकिन अच्छा इसलिए रहा कि मुझे अलग-अलग जगहों पर इतना तजुर्बा हो गया है कि मनोहर लाल खट्टर को इतना तजुर्बा लेने के लिए 700 साल चीफ मीनिस्टर रहना पड़ेगा जबकि उनका वक्त तो खत्म हो चुका है, इसलिए मेरे लिए यह बहुत अच्छा रहा है। ऐसा कोई महकमा बचा ही नहीं जिसका मुझे तजुर्बा ना हो, इसका अब इस्तेमाल जनता की भलाई के लिए करेंगे। रही बात पार्टी में मेरे तबादलों की. तो हम तो तबादले करने वालों में होंगे। हम गलत सलत तबादले नहीं होने देंगे।

सवालः आईएएस की नौकरी करने के बाद आप राजनीति में आए हैं, कुछ तो मंशा रही होगी आपकी ?

जबावः देखिये मैं अच्छी राजनीति के करने के लिए राजनीति में आया हूं मुझे जनता और आम लोगों की राजनीति नहीं करनी है और इसका सबसे अच्छा मुझे कांग्रेस ही लगी, क्योंकि यह आम जनता की पार्टी है और राहुल गांधी जी के नेतृत्व में काम करना चाहता हूं।

सवालः पिछली बार कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के बहुत आरोप लगे थे, अब जनता के बीच जाते हैं क्या कुछ सुनने को मिलता है ?

जबावः देखिये कांग्रेस में भ्रष्टाचार नहीं बल्कि सरकार में था, उस वक्त बहुत से घटकों के साथ मिलकर सरकार बनी हुई थी। अब ऐसा कुछ नहीं है मैं जनता के बीच जा रहा हूं तो मुझे लोगों से अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। सभी से स्वागत का भाव मिला है।

सवालः कांग्रेस में आप शामिल हुए हैं, कुछ तो अरमान लेकर आएं होंगे, कोई सीट तो आपके निशाने पर होगी ही ?

जबावः देखिये में कांग्रेस में शामिल जनसेवा के लिए हुआ हूं, मैंने पार्टी से किसी प्रकार की मांग नहीं रखी है, किसी भी सीट को लेकर कोई समझौता नहीं है। अगर पार्टी मुझे मौका देती है तो मेरा इलाका भिवानी, महेंद्रगढ़, दादरी है। अगर इसी जगह से कहीं से टिकट मिलती है तो यहां सेवा का मौका मिलेगा. इस इलाके में बेरोजगारी बहुत है, लोगों के काम नहीं हो रहे है। ऐसे में इस इलाके के विकास के लिए मैं कुछ कर सकूं।

सवालः बेरोजगारी बढ़ रही है, युवाओं के सक्षम योजना में गोबर उठवाया जा रहा है, ये कैसा रोजगार समझते हैं आप ?

जबावः देखिये ये तानाशाही का नमूना है. जब जनता का चूना हुआ नुमाइंदा खुद को बादशाह की तरह पेश करता है. ये बहुत गलत सिच्यूशन है, वो खुद को हिटलर समझता होगा, लेकिन जोकर दिखाई देता है। सीएम को इंसानियत दिखानी चाहिए, बच्चों से इस प्रकार के बेकार का काम कभी नहीं लिया जाना चाहिए। मैं तो कहता हूं स्कूलों के बच्चों को रैलियों में भीड़ दिखाने के लिए झंडे उठवाकर खड़े कर देते हैं, ये बहुत गैरजिम्मेदाराना है, ऐसे में तो अभिभावकों को आवाज उठानी चाहिए।

सवालः सीएम साब के खुले दरबार को लेकर पर्दा लगाने को लेकर विवाद उठ रहा है, आप की क्या राय है ?

जबावः देखिये उन्होने परिवार तो बसाया नहीं है, तो उनको सामाजिक समझ नहीं है, जनता की दुख तकनीकों से वो अनजान हैं।

सवालः आपने कहा था कि सीएम के साथ नौकरियों को लेकर रात को ही पर्चियां पहुंच जाती है, इसका आपके कहने का क्या मतलब था ?

जबावः देखिये इसको अतिनाटकीय रुप ना भी दिया जाए तो भी मेरा कहना यही है कि बीजेपी में आरएसएस नाम का एक गुप्त संघठन जो अपने तरीके से काम करता रहता है, वो सरकार की निर्णयशक्ति और वास्तविक निर्णयों को प्रभावित करते हैं। उनका काम करने का जो तरीका है वो हमारी असेंबली के रुल के हिसाब से मान्य नहीं है।तो ऐसे में इनकी ये गतिविधियां हमारे सिस्टम के साथ भद्दी रुप से छेड़छाड़ है। और ये लोकतंत्र के साथ द्रोह की अवस्था है। ये मैंने अपनी आंखों से देखी है। और ये स्थिति जितनी जल्दी ठीक हो और लोकतंत्र बहाल हो उतना ही जल्दी ठीक है। यह बीजेपी और आरएसएस की सेहत के लिए भी बहुत जरुरी है। और अगर ये जनता के बीच एक बार न्याय औचित्य की बात खो बैठे तो जनता इनको सौ साल भी मात नहीं देगी।

सवालः अब आपके दौरे चल रहे हैं ग्रामीणों के बीच जा रहे हैं, तो कैसा रिस्पांस मिल रहा है ?

जबावः देखिये कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रम चल रहे हैं, इसका एक पक्ष तो है कि चाय बहुत पीनी पड़ती है, बाकी आरएसएस के लोग भी मिल रहे हैं, पहलवान भी मिल रहे हैं और किसान भी मिल रहे हैं, एक अच्छी सेहतपूर्ण बहस करने का भी मौका मिलता है। और एक दूसरे की बात सुनने का भी मौका मिल रहा है।

सवालः जीएसटी लागू हुए एक साल हो चुका है, आप इसको कैसे देखते हैं ?

जबावः जीएसटी लागू किये जाने से ही हिंदूस्तान के कारोबारियों के व्यासाय का, उनके कारोबार का बंटाधार का कारण रहा है, आज हिंदूस्तान अंदर से खोखला हो चुका है, आज हम विश्व के लेवल पर आर्थिक रुप से पिछड़ रहे हैं। आज हम दुनियां के 134 नंबर पर आ गए हैं। यह सबसे त्रासद हाल है।

हाल ही में निकी हैली(US Ambessador in United Nations) ने भारत के प्रधानमंत्री को बुलाकर कहा है कि इरान से कोई कारोबार ना रखे, हमारे प्रधानमंत्री ने भी हां कर दी। यहीं बात पांच-सात साल पहले अमेरिका ने डॉ. मनमोहन सिंह को बुलाकर कही थी, लेकिन मनमोहन सिंह ने इस बात को मानने से इंकार कर दिया था। मनमोहन सिंह ने उस वक्त कहा था कि हम अपने फैसले खुद लेंगे। इरान से कोई खरीददारी बंद नहीं की थी बल्कि और बढ़ा दी थी। आज हम अपने फैसले लेने में सक्षम नहीं है, आज हम बहुत पिछड़ रहे हैं, इसके पीछे सिर्फ जीएसटी और नोटबंदी का फैसला है।

सवालः जीएसटी को लेकर कारोबारियों ने बहुत विरोध किया था, उसको लेकर अब कांग्रेस का क्या स्टैंड है ?

जबावः देखिये जीएसटी का आईडिया कांग्रेस का ही था, लेकिन बीजेपी ने जल्दबाजी में इसे बिना तैयारी के शुरु किया है, लेकिन बीजेपी इसे सही रुप से लागू नहीं कर पाई है। इसको 20 बार बदल चुके हैं। बीजेपी जीएसटी को चुनाव के हिसाब से लागू कर रही है। अगर गुजरात में चुनाव है तो वहां पर स्लैब घटा देते हैं। जैसे बंदर उस्तरे का इस्तेमाल करते हैं, उसी प्रकार से बीजेपी इसका इस्तेमाल कर रही है। देखिये ये सरकार खजाना खाली करने में जुटी है, देखिये मोदी जी को तो अब जाना है लेकिन जनता के साथ ये गद्दारी कर रहे हैं। देश के ऊपर इतना कर्ज चढ़ाकर जा रहे हैं, जो आगे आने वाले लोगों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है।

सवालः विदेशों में भारत का पैसा बढ़ रहा है, मोदी जी बहुत यात्रा कर रहे हैं, कितना विकास हो रहा है ?  

जबावः देखिये मोदी जी ने अपनी 40-45 देशों की विदेश यात्राओं पर करीब 3 अरब रुपये खर्च कर दिये थे, जो इन्होने आरटीआई में खुद बताए हैं। एक आदमी अरबों रुपये खर्च कर रहे हैं विदेशों में घूमने के लिए, मेरे हिसाब से तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। यह गरीब देश है और आप पैसे को विदेश यात्राओं पर ऐसे खर्च ही नहीं जैसे आग लगा रहे हो। ऐसे में इनसे ये पैसे वसूल होने चाहिए। ये पैसा देश का है, इसको खर्च करने की बजाय पैसे को आग लगा रहे हैं, गरीब देश है इसका ऐसे पैसे बर्बाद ना करें।

सवालः मोदी साब ने कहा था कि 15 लाख रुपये खातों में आएंगे, विदेशों में भारतीयों के पैसों में 50 फीसदी की बढोत्तरी होगी, क्या लगता है आएंगे या नहीं ?

जबावः 15 लाख भी देखिये और इन्होने घोषणापत्र के वादों को तो अबतक खोलकर पढ़ा भी नहीं देखा है. इस दिशा में एक कदम भी नहीं बढे है जबकि सैंकड़ों कदम चलना था। इन्होने दस करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था। इन दस करोड़ में से एक करोड़ को तो रोजगार मिला नहीं, बल्कि लाखों लोगों का रोजगार नोटबंदी और जीएसटी की वजह से खत्म कर दिया है। एक नौजवान की क्षमताओं का हम आज उपयोग ही नहीं कर पा रहे, देखिये जिन्होने रोजगार के लिए आईटीआई व अन्य डिग्रीयां किये युवा बेरोजगार बैठे हैं, ऐसे युवा उल्टे कदम उठा रहे हैं, उनके भरोसे खुद का करियर, परिवार है, तो वो कोई धर्म बदल रहा है, कोई चोरी कर रहा है, अगर कोई मर रहा है तो इसके लिए ये सरकार जिम्मेदार है। आज बेरोजगारी की वजह से त्रासदी का माहौल है और इसके लिए ये सरकार की नीतियां जिम्मेदार है जो करना चाहिए वो ये सरकार नहीं कर रही है। अब देश की जनता इनसे छुट्टी चाहती है और इनसे छुट्टी का सिर्फ एक ही रास्ता है, वो है सबको साथ लेकर चलने वाली पार्टी कांग्रेस है। जो इंकलाब की नहीं बल्कि विकास की बात करती है।

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